सीस्मिक जोन चार में आने वाली राजधानी में लगातार भूकंप के झटकों को देखते हुए अब सभी भवनों का संरचनात्मक और ऑडिट किया जाएगा। इसमें निजी और सरकारी दोनों ही संपत्तियां शामिल हैं। इस संबंध में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अपनी वेबसाइट पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आदेश भी जारी किया है।
दरअसल, राजधानी में भवनों के संरचनात्मक ढांचे की मजबूती को परखने के लिए हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले सभी सिविक एजेंसियों को संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था। इसको देखते हुए डीडीए ने 21 मार्च 2001 तक बनी हुई सभी सरकारी व गैर सरकारी भवनों के लिए संरचनात्मक ऑडिट को जरूरी बताया है। इस संबंध में संपत्ति मालिकों को अपने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट करा छह महीने के भीतर रिपोर्ट को डीडीए में जमा कराना होगा। यदि संपत्ति मालिक ऐसा नहीं करते हैं तो डीडीए द्वारा उनके खिलाफ कार्यवाई भी की जाएगी।
मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थान के संरचनात्मक अभियंता से कराना होगा ऑडिट
डीडी अनुसार, 2001 तक बनी 15 मीटर या इससे ऊंची इमारतों के मालिकों को भवन का ऑडिट मान्यता प्राप्त किसी सरकारी संस्थान के अभियंता से कराना होगा। जिसमें यह पता चलेगा कि इमारत भूकंप अथवा किसी अन्य प्राकृतिक आपदा सहने में कितनी सक्षम है। यदि भवन में कोई खामी पाई जाती हस्त्रै तो इसके लिए संरचानात्मक अभियंताओं द्वारा बताए गए सुझावों के तहत भवन मालिकों को स्वयं भवन की मरम्मत समेत अन्य काम कराने होंगे। इसके लिए भवन मालिक स्वयं जिम्मेदार हैं। जिसके बाद ऑडिट रिपोर्ट को छह महीने के भीतर डीडीए में जमा कराना होगा। बताया जा रहा है कि यह उन सभी भवनों के लिए लागू है जिनको राजधानी में बने हुए 30 साल पूरे हो चुके हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम भी करवा रहे हैं संरचनात्मक ऑडिट
गौरतलब है कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली के तीनों नगर निगम भी अपने अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में संपत्ति मालिकों से आग्रह कर भवन संरचनात्मक ऑडिट करवा रहे हैं। इस संबंध में तीनों नगर निगमों द्वारा नोटिस भी जारी किया गया है। जिसके बाद नगर निगम को भवनों के संरचनात्मक रूप को लेकर शिकायतें मिलना भी शुरू हो चुकी हैं।