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प्रेमी की पत्नी की हत्या के षड्यंत्र में आरोपी महिला को राहत नहीं

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने प्यार में बाधा बन रही प्रेमी की पत्नी की हत्या के षड्यंत्र में आरोपी एंजेल गुप्ता को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा उसके खिलाफ हत्या व षड्यंत्र के आरोप में तय अभियोग संबंधी फैसले को उचित ठहराया है। अदालत ने कहा कि याची के खिलाफ हत्या व आपराधिक षड्यंत्र रचने का मुकदमा चलाने की इजाजत देने वाले फैसले में कोई खामी नहीं है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने एंजेल गुप्ता की अभियोग को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसके खिलाफ हत्या के षड्यंत्र व अन्य कोई भी साक्ष्य नहीं है।
अदालत ने कहा षड्यंत्र के मामले में प्रत्येक षड्यंत्रकारी को पूरी भूमिका नहीं निभानी होती है। अभियोजन पक्ष के लिए यह दिखाना पर्याप्त है कि दो या अधिक व्यक्तियों ने अपराध करने की साजिश रची। यह साबित करना ही काफी है कि आरोपी के मन में क्या है और उसका क्या उद्देश्य है।
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अदालत ने कहा कि मामले में याची व अन्य आरोपियों के बीच कॉल डिटेल्स से लेकर घटना के समय घटनास्थल के पास उसके पिता की मौजूदगी के अलावा याचिकाकर्ता मृतका के पति के साथ लगातार संपर्क में थी। इतना ही नहीं जांच व पेश साक्ष्यों से अपराध में याचिकाकर्ता की संलिप्तता दिखाने के लिए अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त सामग्री है।
पेश मामले में बवाना इलाके में 29 अक्तूबर 2018 को सुनीता नामक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतका के भाई ने बयानों में कहा कि उनकी बहन के पति मनजीत सहरावत के एंजेल गुप्ता से अवैध संबंध हैं। उसने ईमेल व उनके फोटो भी पुलिस को सौंपे।
वहीं मृतका की लड़की ने भी अपने बयानों में एंजेल व अपने पिता के संबंधों की जानकारी देते हुए कहा कि एंजेल उनकी मां को जान से मारने व बच्चों के अपहरण की धमकी देती है। इतना ही नहीं उस वर्ष करवा चौथ का त्यौहार उनके पिता को अपने साथ मनाने के लिए कहा था। आरोपी अपने नाम के साथ उनके पिता का सरनेम सहरावत भी प्रयोग करने लगी थी।
याची ने तर्क रखा था कि उसका हत्या से कोई लेनादेना नहीं है। उसके पास से न तो कोई बरामदगी हुई न ही किसी सह-आरोपी ने ऐसा बयान दिया कि षड्यंत्र व अपराध के लिए पैसे दिए। वह न तो घटनास्थल पर मौजूद थी न ही उसे हत्या के षड्यंत्र की जानकारी थी।
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