फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली दंगा: हेड कांस्टेबल मौत मामले में महिला सहित चार आरोपियों को जमानत नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली पुलिस के हवलदार रतन लाल की मौत से जुड़े मामले में एक महिला समेत चार दंगा आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों पर गंभीर आरोप हैं और जांच महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में उन्हें जमानत प्रदान करने का कोई आधार नहीं है। यह मामला हैड कांस्टेबल की मौत व 50 पुलिसकर्मियों के घायल होने से जुड़ा है।
विज्ञापन

कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में आरोपी मो. आरिफ, सलीम खान, जलालुद्दीन व तबस्सुम को जमानत देने से इनकार कर दिया। पिछले वर्ष ही मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि आरोपपत्र दायर हो चुके हैं और कई आरोपी जमानत पर हैं।
सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है क्योंकि अन्य आरोपियों की पहचान वैज्ञानिक तरीकेे की जा रही है और उनके बारे में आगे जांच की जाएगी। जांच के बाद पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को अन्य आरोपियों की पहचान करने और उन्हें न्याय के हित में मामला दर्ज करने के लिए आगे की जांच करने से रोका नहीं जा सकता ।
विज्ञापन

वहीं उन्होंने चांद बाग निवासी महिला आरोपी तबस्सुम की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से पता चला है कि वह कई सह आरोपियों से लगातार संपर्क में थी। अपराध की गंभीरता की तुलना में मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने लोगों को भड़काया और कुछ असामाजिक तत्वों ने अपराध स्थल को घेर लिया था। वे पत्थर, लाठी, धारदार हथियार और अन्य प्रकार के हथियारों से पूरी तरह तैयार दिखे। यहां तक कि बुर्का पहने महिलाएं भी लाठी और अन्य सामग्री के साथ पुलिस पर हमला करते हुए दिखाई दी हैं।
इस मामले में आरोपियों को 11 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था और पिछले साल 8 जून को उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हजारों दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में विरोध स्थल पर एकत्र होकर मुख्य वजीराबाद रोड को अवरुद्ध कर दिया था।
डीसीपी शाहदरा और एसीपी गोकलपुरी सहित पुलिस कर्मियों ने जब प्रदर्शनकारियों को मुख्य वजीराबाद रोड को खोलने के लिए मनाने की कोशिश की तो उन पर हमला किया गया। इसमें 50 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इतना ही नहीं हेड कांस्टेबल रतन लाल को गोली लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जांच में कई आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया जिनमें याचिकाकर्ता भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें