नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली हिंसा मामले में एक अस्सी वर्षीय व्यक्ति की हत्या के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों के विश्लेषण से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि आरोपी गैरकानूनी रूप से एकत्रित भीड़ का सदस्य था जिसने बुजुर्ग महिला के घर को आग लगा दी।
कड़कड़डूूूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश घटना स्थल के वीडियोग्राफिक विवरण से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हो रहा है कि शिकायतकर्ता के घर को उपद्रवी भीड़ ने निशाना बनाया था। उन्होंने कहा अकबरी बेगम (शिकायतकर्ता की मां) की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के साथ-साथ घर में आग लग गई और बड़े पैमाने पर तबाही हुई।
इससे पहले आरोपी प्रकाश चांद के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनका मुवक्किल भी उसी इलाके में रहता है, उसे आईपीसी की धारा 149 के तहत दंगों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उसने कभी भी गैरकानूनी भीड़ के साथ किसी आम वस्तु को भी साझा नहीं किया, भले ही वह घटनास्थल पर मौजूद हो। उन्होंने कहा चांद का कॉल डाटा रिकॉर्ड (सीडीआर) लोकेशन, जिस पर पुलिस ने भरोसा किया था, उसे कोई मदद नहीं मिली क्योंकि वह इस इलाके में रहता था और उसी ने यूजर की रियल टाइम लोकेशन नहीं दिखाई, बल्कि सिर्फ अनुमानित लोकेशन ही दिखा।
वहीं अभियोजन अधिकारी ने अदालत को बताया कि सवालों के घेरे में वीडियो क्लिपिंग में भारी भीड़ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी कि अपराध स्थल और उसके आसपास पत्थरबाजी, तोड़फोड़ आदि की गई है। उन क्लिप्स में आरोपी चांद दंगाई भीड़ का हिस्सा दिखाई देता है, जिसने शिकायतकर्ता के घर को आग लगा दी थी।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि चांद छह सेकेंड की क्लिप में साफ दिखाई दे रहा था। यह आवेदक के सीडीआर विवरण से काफी स्पष्ट है। अदालत ने कहा कि वर्तमान में इस मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता कि वह भीड़ में शामिल था लेकिन हिंसा में नहीं। इस मुद्दे पर ट्रायल के दौरान विचार किया जाएगा।