नशे में महिला का लाभ उठाना ठीक नहीं
अदालत ने कहा है कि एक महिला की नशे की हालत उसके पुरुष मित्र को उसकी स्थिति का अनुचित लाभ उठाने का लाइसेंस नहीं देती है। अदातल ने उस व्यक्ति को दोषी ठहराने के आदेश को बरकरार रखा, जिसने पीड़िता को चूमने की कोशिश की थी और जब उसने उसकी बात ठुकरा दी तो उसे थप्पड़ मारा था।
आरोपी को दोषी ठहराना सही
अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल किया है, यह जानते हुए कि वह उसे चूमने की कोशिश करके उसकी विनम्रता को ठेस पहुंचाएगा और स्वेच्छा से उसे थप्पड़ मारकर उसे चोट पहुंचाई। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने आईपीसी की धारा 354 और 323 के तहत अपराध के लिए उन्हें सही दोषी ठहराया है।
वकील की दलील पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने बचाव पक्ष के वकील के इस तर्क को खारिज कर दिया कि पीड़िता को पीटा गया था और यह दिखाने के लिए चिकित्सा साक्ष्य की अनुपस्थिति थी कि पीड़िता ने खुद की चिकित्सकीय जांच नहीं कराई क्योंकि वह कथित तौर पर नशे में थी। अदालत ने कहा किसी व्यक्ति को महज थप्पड़ मारना आईपीसी की धारा 323 के तहत अपराध का मामला बनाने के लिए पर्याप्त है।
इसी तरह, भले ही शिकायतकर्ता की मेडिकल जांच से पता चला हो कि वह उस समय नशे में थी, लेकिन इसका अपने आप में कोई परिणाम नहीं होगा क्योंकि किसी महिला का नशा उसके पुरुष मित्र को उसकी स्थिति का अनुचित लाभ उठाने का लाइसेंस नहीं देता है। अदालत ने गुप्ता के वकील के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि यह शिकायतकर्ता ही थी जिसने उसे मिलने और बात करने के लिए मजबूर किया था।
अदालत ने कहा भले ही यह मान लिया जाए कि शिकायतकर्ता को अपीलकर्ता से मिलने और बात करने में अधिक रुचि थी, इसका मतलब यह नहीं है कि अपीलकर्ता उसे चूमने की कोशिश करने की स्वतंत्रता ले सकता था और उसके इनकार पर उसे थप्पड़ मार सकता है। हालाँकि, अदालत ने गुप्ता को आईपीसी की धारा 506 के तहत आरोप से बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि उसने शिकायतकर्ता को आपराधिक रूप से धमकाया था।