नई दिल्ली। अदालत ने गैंगस्टर कुलदीप फज्जा को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार एक आरोपी को सोमवार को जमानत प्रदान कर दी। फज्जा इस साल मार्च में जीटीबी अस्पताल में पुलिस हिरासत से भागने के बाद मुठभेड़ में मारा गया था।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार मल्होत्रा ने योगेन्द्र दहिया की जमानत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व दो अन्य जमानतियों के आधार पर स्वीकार की है। 25 मार्च को फज्जा को जब मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया तो वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। तीन दिन बाद रोहिणी में दहिया के घर पर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
अदालत ने आरोपी को जमानत प्रदान करते हुए कहा कि जब गैंगस्टर को अस्पताल से फरार करवाया गया आरोपी दहिया अस्पताल में मौजूद नहीं था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जब पुलिस फज्जा को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर आई तो उसने पुलिस कार्रवाई में बाधा पैदा की या नहीं।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि करीब 10-12 लोगों ने पुलिस अधिकारियों पर हमला किया था क्योंकि वे फज्जा को मेडिकल चेकअप के बाद जीटीबी अस्पताल के लॉकअप में ले जा रहे थे। उनमें से एक ने कथित तौर पर गोलीबारी की जबकि अन्य ने हमला किया, हथियार छीनने की कोशिश की, गैंगस्टर को भागने में मदद करने के लिए पुलिसकर्मियों पर मिर्च पाउडर फेंक दिया।
जितेंद्र उर्फ गोगी गैंग का सदस्य फज्जा भागने में कामयाब रहा लेकिन बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार दहिया ने सह आरोपी भूपेन्द्र सिंह के अनुरोध पर दिल्ली के रोहिणी इलाके में अपने घर पर गैंगस्टर को शरण देने पर सहमति जताई थी।
दहिया के वकील परवीण चौधरी ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि उनका मुवक्किल फज्जा को बचाने की साजिश में शामिल था। उसे नहीं मालूम था कि फज्जा पुलिस हिरासत में फरार होकर आया है। दहिया 28 मार्च से न्यायिक हिरासत में था और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, डकैती, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत विभिन्न धाराओं के मामला दर्ज है।