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दंगा मामले में आरोपी खालिद सैफी को कोर्ट ने दी जमानत

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नई दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता खालिद सैफी को शनिवार को अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो गई है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की आशंका नहीं हैं।
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कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ राव ने आरोपी का जमानत देते हुए कहा कि जांच पूरी होने पर आरोपी को जमानत देने में कोई अड़चन नहीं है। जांच से संबंधित तमाम दस्तावेज आरोपपत्र के साथ अदालत में हैं। इसलिए आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी जमानत राशि पर जमानत दी जाती है।
हालांकि, आरोपी सैफी को जमानत मिलने के बाद भी जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। दंगों की साजिश रचने के मामले में उस पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने खिलाफ गैरकानूनी (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर रखा है। सैफी पर दंगे के अलावा आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज है।
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अदालत के समक्ष सैफी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि उनका मुवक्किल एक सम्मानीय परिवार से ताल्लुक रखता है। वह एक कारोबारी है और सामाजिक कार्यकर्ता भी है। उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। वकील ने कहा कि सैफी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दर्ज किया गया है, जबकि चिकित्सा रिपोर्ट में पीड़ित को मामूली चोट आने की बात सामने आई है।
वहीं अतिरिक्त लोक अभियोजक ने आरोपी को जमानत देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी ने अन्य दंगाइयों के साथ मिलकर रास्ता रोका और पुलिस कर्मियों पर पत्थरबाजी की। यहां तक कि पुलिस पर गोली भी चलाई। इतना ही नहीं एक पुलिसकर्मी को इन दंगाइयों ने घेर लिया और उसे चोट पहुंचाई।
सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि खालिद ने सीएए का विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को आर्थिक मदद भी की और अवैध हथियार मुहैया कराए। उसने भीड़ को पुलिस पार्टी पर हमला करने के लिए उकसाया। हालांकि, अदालत ने कहा कि यहां जिस पुलिसकर्मी के जख्मी होने की बात कही जा रही है उसे मामूली चोट आई थी।
पुलिस ने कोर्ट से कहा कि दिल्ली दंगों से जुड़े तीन सुरक्षित (अहम गवाह जिनके नाम आरोपपत्र में छिपाकर रखे गए हैं) गवाहों से दंगों के आरोपियों के निहित स्वार्थ से जुड़े लोगों ने संपर्क किया है। इससे गवाहों की सुरक्षा खतरे में आ सकती है। लिहाजा आरोपी को जमानत न दी जाए।
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