नई दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में गिरफ्तार एक आरोपी को अदालत ने जमानत देने से मंगलवार को इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा वह इस घटना के मुख्य आरोपी आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर दंगे में शामिल हुआ और हत्या की वारदात को अंजाम तक पहुंचवाया।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आरोपी शाह आलम की याचिका को खारिज करते हुए कहा यह साफ तौर पर स्पष्ट है कि यह उन दंगाइयों में शामिल था, जिन्होंने अंकित शर्मा की पीटकर हत्या कर डाली। शाह आलम पर ताहिर हुुसैन की शह पर दंगे में दूसरे समुदाय के लोगों हमला करने का आरोप है। उस पर गंभीर आरोप हैं और जांच अभी जारी है। इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं और मामले की जांच जारी है। अगर आरोपी को जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। वहीं आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक गवाह, जिसने आलम पर दंगे में शामिल होने का बयान दिया है, वह पहले से ही उसका दुश्मन है। वकील ने कहा कि इस मामले में जिन दो पुलिस कर्मियों ने आलम पर दंगे में शामिल होने का आरोप लगाया है, वह बयान भी झूठा है। चूंकि यह संभव ही नहीं कि 1500 दंगाइयों की भीड़ में पुलिसकर्मी एक शख्स को पहचान सकें।
उल्लेखनीय है कि 24 और 25 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के विरोध में हुए दंगे में आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में ताहिर हुसैन मुख्य आरोपी है। इस दंगे में कुल 53 लोगों की जानें गई थीं और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।