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एसएचओ पर एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश

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नई दिल्ली। अदालत ने द्वारका सेक्टर 23 के थानाध्यक्ष के खिलाफ अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अधिनियम (एससी/एसटी अधिनियम) के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त को फैसले के पालन करने का निर्देश दिया है।
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द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने पुलिस को थानाध्यक्ष के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1) (पी) और (क्यू) के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
एसएचओ पीएस द्वारका सेक्टर-23 को संबोधित करते हुए 30 अगस्त, 2018 को शिकायतकर्ता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की जाए। अदालत ने डीसीपी को शिकायतकर्ता द्वारा 30 अगस्त 2018 को दी शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने कहा कि थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी लोक सेवक है ऐसे में मुकदमा दर्ज करने के लिए सीआरपीसी के तहत उसे कोई संरक्षण प्राप्त नहीं है। आरोपी को संज्ञान के दौरान संरक्षण प्रदान किया जा सकता। आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है।
अदालत ने कहा कि जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया पता चलता है कि पुलिस ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल याची की शिकायत से झुंझला कर किया। हालांकि यह एक अलग मामला है। इतना ही नहीं शिकायतकर्ता के खिलाफ शिकायत करते समय आधिकारिक लेटर पैड का उपयोग कर आरोपी ने सरकारी पद का दुरुपयोग किया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अनाधिकृत रूप से बन रही बिल्डिंगों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग मैटीरियल के कारण उनके मुवक्किल के घर का रास्ता रूक गया था और उसने पुलिस से शिकायत की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई के कारण आरोपी व्यक्तियों ने उनके मुवक्किल को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा कि थानाध्यक्ष ने पद का दुरुपयोग कर अपने आफिशियल लैटर हैड पर डीसीपी को उनके मुवक्किल के खिलाफ झूठे आरोप की शिकायत की। शिकायत एससी-एसटी एक्ट से संबंधित थी जबकि आरोपी को पता था कि शिकायतकर्ता इस समुदाय से है।
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