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दिल्ली दंगा: ताहिर की जमानत अर्जी रद्द, कोर्ट की टिप्पणी-पार्षद ने दंगाइयों को 'मानव हथियार' के रूप में किया इस्तेमाल

Sat, 15 May 2021 10:22 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की गंभीरता और इलाके में उसके प्रभाव को देखते हुए ताहिर हुसैन को राहत प्रदान नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल सांप्रदायिक आग की लपटों को भड़काने और हवा देने में सरगना के रूप में किया। 
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ताहिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने हालांकि दिल्ली दंगो में सीधे रूप से अपने हाथ मुट्ठी का इस्तेमाल नहीं किया लेकिन उसने दंगाइयों को 'मानव हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया जो उनके भड़काने पर किसी भी मार सकते थे। प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि आरोपी ने अपनी ताकत और राजनीतिक पावर का इस्तेमाल सांप्रदायिक आग की लपटों को भड़काने और हवा देने में मास्टरमाइंड के रूप किया। अदालत ने दंगो के दो मामलों में ताहिर की जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की गंभीरता और इलाके में उसके प्रभाव को देखते हुए उसे राहत प्रदान नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल सांप्रदायिक आग की लपटों को भड़काने और हवा देने में सरगना के रूप में किया। अदालत ने कहा भले ही याची ने हिंसा में प्रत्यक्ष रुप से भाग नहीं लिया लेकिन यह भी स्पष्ट है कि उसकी इमारत दंगाइयों और रैबल-राउस के लिए दिल्ली में विभाजन के बाद हुए सबसे ज्यादा सांप्रदायिक दंगों की केंद्र बन गई। अदालत ने कहा कि यह हिंसा भारत जैसे देश जो सुपरपावर बनने की राह पर है, उसकी अंतरात्मा पर एक गहरा जख्म है।

हत्या के यह दो मामले अजय कुमार झा और प्रिंस बंसल की शिकायतों पर दर्ज किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि 25 फरवरी 2020 को हुसैन के घर की छत से उपद्रवी भीड़ द्वारा पथराव करने, पेट्रोल बम फेंकने और गोलीबारी करने के बाद उन्हें चोटें आईं। 
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अदालत ने हुसैन ने अपने घर को दंगाइयों द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर तबाही मचाने, आतंकी फंडिंग में लिप्त होने और मानव हथियारों के रूप में व्यक्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि यह अनुमान लगाने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है कि हुसैन अपराध के स्थान पर मौजूद था और एक समुदाय विशेष के दंगाइयों को उकसा रहे थे।

अदालत ने कहा आरोपी के खिलाफ 11 मामलों में साक्ष्य हैं और उसके बैंक खातों से कुछ संदिग्ध धन लेनदेन भी किया गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और तथ्यों, परिस्थितियों, अपराध की गंभीरता और याची के इलाके में प्रभाव को देखते हुए उनकी नजर में वर्तमान में उसे जमानत देना उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील अमित प्रसाद ने कहा कि पांच चश्मदीद गवाहों व शिकायतकर्ता के बयानों से स्पष्ट कि ताहिर ही दंगो में मुख्य षडयंत्रकर्ता है। उसने एक समुदाय विशेष के खिलाफ दंगा करवाने व दंगाईओं को डंडे, लाठी, पत्थर, एसिड बोतल, चाकू सहित अन्य हथियार अपने मकान की छत पर उपलब्ध करवाएं।
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याची के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल को राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है।

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