नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली पुलिस को एक डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक प्रकाश जारवाल की आवाज के नमूने तुरंत फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में जमा करने का निर्देश दिया है। जारवाल पर 52 वर्षीय डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
राउज एवेन्यू अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने मामले की जांच में देरी पर पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि हर कदम पर देरी की जा रही है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि प्रकाश जारवाल व सह-आरोपी हरीश कुमार की आवाज के नमूने जल्द से जल्द एफएसएल में जमा करवाएं। अदालत ने जांच अधिकारी को 20 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
दरअसल अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों के नमूने लिए गए लेकिन उन्हें जांच के लिए लैब में जमा नहीं करवाया गया।
वहीं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले दिनों गणतंत्र दिवस परेड व किसान आंदोलन में अधिकांश स्टाफ तैनात था। अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इससे पहले भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में जारवाल जमानत पर हैं और उन्होंने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट किसी अन्य रंग की स्याही से लिखा गया व मृतक के हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
जारवाल के अधिवक्ता ने कहा कि मृतक की पत्नी ने आत्महत्या से ठीक एक सप्ताह पहले दिल्ली जल बोर्ड को एक शिकायत दी थी। उसमें जबरन वसूली के आरोप नहीं हैं और प्रकाश का नाम कहीं नहीं लिया गया। मृतक परिवार का मकसद उनके मुवक्किल को फंसाने का था क्योंकि मृतक और उसके बेटे को पानी के टैंकर की किसी भी गतिविधियों को अंजाम देने से दिल्ली जल बोर्ड से अलग किया गया था।
वहीं मृतक के बेटे का आरोप है कि उनके पिता जल बोर्ड में टैंकर के जरिये पानी सप्लाई करते थे और जारवाल ने रिश्वत मांगी थी जिसके न देने पर पानी सप्लाई व भुगतान रोक दिया गया।