दैनिक मामलों का औसत भी 65 रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि महामारी का दायरा सिकुड़ चुका है, लेकिन अभी भी लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वायरस का प्रसार रूका है। यह खत्म नहीं हुआ है।
राजधानी में कोरोना की पहली लहर की शुरुआत के बाद संक्रमण अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। कोरोना के सभी मानक इसकी तस्वीर पेश कर रहे हैं। दिल्ली में अब 800 से कम सक्रिय मरीज बचे हैं। संक्रमण दर 0.10 फीसदी से भी कम हो गई है।
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दैनिक मामलों का औसत भी 65 रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि महामारी का दायरा सिकुड़ चुका है, लेकिन अभी भी लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वायरस का प्रसार रूका है। यह खत्म नहीं हुआ है।
दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में दूसरी लहर आई थी। तब अप्रैल में सक्रिय मरीजों की संख्या करीब एक लाख हो गई थी। इस कारण अस्पताल भी पूरी तरह भर गए थे और घर पर इलाज कराने वालों की संख्या भी 50 हजार के पार पहुंच गई थी, तब महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक सक्रिय मरीज दिल्ली में ही थे।
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यहां जितने तेजी से महामारी फैली थी। उतनी ही तेजी से कम भी हुई। आंकड़े बताते हैं कि दो माह में ही 81 हजार सक्रिय मरीज कम हो गए। इससे अस्पतालों में रोगियों की संख्या भी घटी और वायरस भी काबू में आ गया। अब सक्रिय मरीजों की संख्या 743 रह गई है और अस्पतालों में केवल 421 रोगी भर्ती हैं। दूसरी लहर में दैनिक मामलों की जो संख्या 28 हजार के पार थी अब 60 से कम है। यह सभी मानक पहली लहर की शुरुआत के बाद अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं।
इन कारणों से कोरोना है सबसे निचले स्तर पर
सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक, दिल्ली में कोरोना के सबसे निचले स्तर आने के चार प्रमुख कारण है। इनमें पहला यह है कि दूसरी लहर में करीब 80 फीसदी आबादी संक्रमित हो चुकी है। इन सभी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है।
इसलिए अभी यह वायरस की चपेट में नहीं आ रहे हैं। दूसरा यह है कि भले ही अन्य राज्यों में वायरस के कई म्यूटेशन सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली में फिलहाल क नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। तीसरा यह है कि इस बार कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए सरकार ने काफी सख्ती की हुई है। चौथा यह है दिल्ली कि करीब 45 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन हो चुका है।
इसी स्थिति को बनाए रखना एक चुनौती
एम्स के पूर्व डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि दिल्ली में वायरस दम तोड़ रहा है। हालात काफी बेहतर हैं, लेकिन तीसरी लहर के खतरे के बीच इस स्थिति क बनाए रखना एक चुनौती है, क्योंकि वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में अगर कोई नया स्ट्रेन आता है तो वह तेजी से फैल सकता है। इससे बचने के चार तरीके हैं। पहला की इसी तरह कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।
दूसरा संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिग लगातार क जाए और इसमें अगर कोई नया स्ट्रेन का मरीज मिले तो उसके इलाके के तुरंत कंटेन किया जाए। तीसरा यह है कि सरकार ने जो कलर कोड प्रणाली शुरू की है, उसको प्रभावी रूप से लागू करें। चौथा अधिक से अधिक टीकाकरण हो। इस सभी कदमों से स्थिति नियंत्रण में रहेगी और अगली लहर आने की आंशका काफी कम हो जाएगी।