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कोरोना का कहर: मरीजों की जांच रिपोर्ट निगेटिव, फिर भी चार दिनों में फेफड़ों तक पहुंच रहा वायरस

Thu, 15 Apr 2021 04:02 AM IST
प्राची प्रियम परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

राजधानी के अस्पतालों में भर्ती मरीजों में कोरोना का नया स्वरूप मिल रहा है जिससे डॉक्टर भी हैरान हैं। चार दिन में ही 60-70 फीसदी फेफड़े वायरस के कब्जे में हो जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सीटी स्कैन के जरिए वायरस का पता चल रहा है।
 
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली के डॉक्टर काफी हैरान और परेशान भी हैं। संक्रमण की जांच रिपोर्ट निगेटिव मिलने के बाद भी चार दिन में मरीज के फेफड़े वायरस के कब्जे में आ रहे हैं। ऐसे एक या दो नहीं बल्कि कई केस राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में अब तक सामने आ चुके हैं। 

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इन मरीजों की आरटी पीसीआर जांच में भी संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। जब इनका सीटी स्कैन कराया गया तो पता चला कि 60 से 70 फीसदी फेफड़े वायरस से कवर हो चुके हैं। ऐसी अवस्था को गंभीरता से जोड़कर देखा जाता है। 

डॉक्टरों के अनुसार बुखार, खांसी, सांस फूलने जैसी परेशानी होने के बाद भी मरीज की रिपोर्ट निगेटिव मिल रही है। आरटी पीसीआर जांच को अब तक सबसे बेहतर माना जा रहा है लेकिन इन मरीजों की पहचान इस जांच में भी नहीं हो पा रही है। लक्षण होने के बाद भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है लेकिन मरीज की हालत नाजुक बनी हुई है। 
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जब मरीज की सीटी स्कैन जांच कराई जाती है तब तक वायरस के फैलाव का पता चलता है। फोर्टिस अस्पताल के डॉ. भरत गोपाल का कहना है कि निगेटिव रिपोर्ट मिलने की वजह से कई मरीज निगरानी से बाहर जा सकते हैं। उनके पास आए दिन ऐसे केस मिल भी रहे हैं। 

किसी-किसी मरीज के गले या नाक में वायरस का पता नहीं चल रहा है। दिल्ली एम्स के डॉ. विवेक बताते हैं कि पिछले सप्ताह शालीमार बाग से 45 वर्षीय एक मरीज को भर्ती किया था। मरीज की दो बार आरटी पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अस्पताल आने के बाद मरीज के लक्षण कोविड-19 से जुड़े थे। 

इसलिए शनिवार को तीसरी बार टेस्ट कराया, लेकिन उसमें भी संक्रमण का पता नहीं चला। बीते सोमवार को सीटी स्कैन से पता चला कि मरीज के फेफड़े काफी हद तक वायरस की जद में आ चुके थे। यह स्थिति पिछले साल तब दिखाई देती थी जब मरीज के संक्रमित हुए आठ से 10 दिन हो जाते थे। 

इससे पता चल रहा है कि वायरस में आए नए बदलाव न सिर्फ काफी आक्रामक हैं बल्कि यह चंद दिनों में ही मरीज को काफी गंभीर हालात में डाल सकते हैं। इसलिए लोगों को सचेत रहना बहुत जरूरी है। 

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डबल मास्क के बिना सुरक्षा नहीं 

दिल्ली एम्स के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अनूप मिश्रा का कहना है कि इस वक्त लोगों को मास्क से परहेज नहीं करना चाहिए। हालात इस कदर पहुंच चुके हैं कि लोगों को डबल मास्क का इस्तेमाल ही करना चाहिए। एक डिस्पोजल और दूसरा किसी कपड़े से बना मास्क पहना जा सकता है। 

अगर किसी के पास कपड़े का मास्क है तो उसके ऊपर एक सर्जिकल मास्क भी जरूर लगाएं। ऐसा करने से संक्रमण की आशंका को 95 फीसदी तक कम किया जा सकता है। सीडीसी की गाइडलाइन में भी एक दम फिट मास्क पहनने के लिए डबल मास्क का प्रयोग करने के लिए कहा गया है।
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