कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए 12वीं की परीक्षा स्थगित किए जाने के सीबीएसई के फैसले का स्कूलों ने स्वागत किया गया है। जबकि 10वीं की परीक्षा रद किए जाने को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि दसवीं के रिजल्ट के लिए एक उचित मानदंड तय होना चाहिए। वहीं बारहवीं के लिए परीक्षा कार्यक्रम जल्द घोषित किया जाना चाहिए।
दिल्ली पब्लिक स्कूल आरकेपुरम की प्रिंसिपल पद्मा श्रीनिवासन का कहना है कि बीता एक साल महामारी के कारण शिक्षक और छात्रों केलिए बहुत कठिन था। स्कूलों की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में आ गई है। जिसे छात्रों ने बेहतरीन तरीके से स्वीकार किया है। इस कठिन परिस्थिति में केंद्र सरकार ने भी बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए हैं। मौजूदा समय में कोरोना महामारी को नियंत्रित करने केलिए लिहाज से बोर्ड की ओर से उठाया गया यह बेहतर कदम है। जो सभी के लिए बेहतर सिद्ध होगा।
एर्फोडेबल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन(एप्सा) के अध्यक्ष व एसआर कैपिटल पब्लिक स्कूल के चेयरमैन लक्ष्य छाबडिय़ा ने कहा कि कोविड मामलों के बढने के चलते केंद्र सरकार की तरफ से बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित किए जाने का फैसला सभी पक्षों के लिए सकारात्मक है। कई स्कूलों में कोविड के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे समय में निर्धारित प्रक्रिया के तहत बोर्ड परीक्षा संभव ही नहीं थी। केंद्र सरकार के फैसले से स्कूलों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों, सभी को लाभ होगा और कोविड मामलों के नियंत्रण में सहायता मिलेगी।
दरियागंज स्थित डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल रमाकांत तिवारी ने कहा कि बारहवीं की परीक्षा के लिए लिया गया फैसला अच्छा है। लेकिन दसवीं की परीक्षा केलिए उचित मानदंड होना चाहिए। जिससे कि ग्यारवीं व बारहवीं में बच्चों पर प्रभाव ना पड़े। दसवीं की परीक्षा के लिए भी कुछ विकल्प होना चाहिए। पटेल नगर स्थित एसडी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल मीनाक्षी गुप्ता ने इस सरकार व बोर्ड के फैसले को छात्रों व शिक्षकों के लिए काफी राहत भरा बताया।
उन्होंने कहा कि बीते एक साल से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे स्कूल आकर जैसी तैयारी होती है वैसी तैयारी नहीं हो रही थी। ऐसे में अब परीक्षा स्थगित होने से उन्हें तैयारी के लिए एक अतिरिक्त महीना मिल गया है। बारहवीं की परीक्षा से बच्चों का कैरियर जुड़ा होता है इसलिए इसे रद नहीं किया जा सकता था। वहीं दसवीं केबच्चों की परीक्षा रद होने के कारण काफी हद तक टेंशन कम हुई है। पहले जब सीसीई व्यवस्था थी तब भी दसवीं बोर्ड नहीं था और बच्चों का मूल्यांकन हो जाता था।
बढ़ते संक्रमण की वजह से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं की परीक्षाएं रद्द और 12वीं की स्थगित कर दी गई है। हालांकि यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में छात्र दुविधा में हैं। कुछ विद्यार्थियों का कहना है कि सीबीएसई की तरह यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी स्थगित हो जाएंगी। वहीं, कुछ का कहना है कि परीक्षाएं स्थगित नहीं होनी चाहिए। इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाए। परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की संख्या और कम कर देनी चाहिए।
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी स्थगित होनी चाहिए। अगर केंद्र में एक भी बच्चे को कोरोना हुआ तो बहुत बच्चे संक्रमित हो सकते हैं। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए बोर्ड को भी फैसला लेना चाहिए। - अनन्या सिंह, 12वीं कक्षा
परीक्षाएं अभी नहीं, स्थिति बेहतर होने के बाद होनी चाहिए। इससे तैयारी करने का समय भी मिल जाएगा। इस बार ऑनलाइन कक्षाएं और देर से स्कूल खुलने की वजह से सभी की तैयारी नहीं हो पाई है।
राशि पायल, 12वीं कक्षा
बच्चों को मेहनत का परिणाम मिलना चाहिए। सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा सकती है।
- गीता शर्मा, प्रिंसिपल, श्याम सिंह स्मारक कन्या इंटर कॉलेज
सीबीएसई की तरह यूपी बोर्ड को भी फैसला लेना चाहिए। 12वीं की परीक्षाएं कराई जा सकती हैं, क्योंकि इनको उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेना होता है, लेकिन इस दौरान सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।
- डॉ. राकेश कुमार राठी, जनता इंटर कॉलेज, रोजा याकूबपुर