ओमिक्रॉन का असर मरीजों में हल्का जरूर देखने को मिल रहा है, लेकिन इसे माइल्ड समझने की गलती बिलकुल न करें। अस्पताल, जनता और सरकार सभी को पैनिक होने की जरूरत नहीं है लेकिन सतर्कता बरतने का यही समय है। सभी को आगामी दिनों के लिए तैयारियां करने का वक्त अभी है। इसके बाद स्थिति क्या हो सकती है? इसके बारे में फिलहाल किसी को जानकारी नहीं है।
यह जानकारी देते हुए साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि किसी भी तरह की महामारी का आकलन करने के लिए कुछ वक्त देना जरूरी है। दिल्ली में ओमिक्रॉन के मामले तीन सप्ताह पहले से आना शुरू हुए हैं। उनके यहां भी ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों में लक्षण बहुत हल्के हैं। ज्यादातर ये युवा वर्ग से हैं जो हाल ही में विदेशों से लौटकर आए हैं। हालांकि दिल्ली में कोरोना संक्रमण भी बढ़ रहा है जिसका उसर उनके यहां भी अस्पताल में दिखाई दे रहा है। इन मरीजों में ओमिक्रॉन भी हो सकता है या फिर डेल्टा वैरिएंट भी।
डॉ. संदीप ने कहा कि अभी कुछ भी भविष्य वाणी करने से पहले हमें कुछ वक्त का इंतजार करना चाहिए। जनवरी माह के मध्य तक ही एक तस्वीर समझ आएगी। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन भारत में भी वैसा ही असर दिखा रहा है जो दूसरे देशों में दिख रहा है। अब चूंकि कुछ देशों में गंभीर मामले भी आ रहे हैं। ऐसे में हमें थोड़ा इंतजार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन का मामला अब सामुदायिक प्रसार से जुड़ा है।
वहीं, लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि मरीजों पर ओमिक्रॉन का हल्का असर जरूर है। लोगों में पैनिक नहीं फैले, इसलिए उन्हें यह पता होना जरूरी है लेकिन दिल्ली में लोग लापरवाह दिखाई दे रहे हैं। इसका नुकसान आगामी दिनों में हो सकता है। डॉ. सुरेश ने भी दिल्ली में कोरोना के सामुदायिक प्रसार पर सहमति जताई है।
इनके अलावा सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि इनदिनों आम जनता के अलावा सरकार भी ओमिक्रॉन को अधिक गंभीरता से नहीं ले रही है। ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर आधी अधूरी तैयारियों के साथ प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। दिल्ली की बात करें तो यहां ऑफिस, बाजार, सार्वजनिक स्थल सब पहले जैसे चल रहे हैं लेकिन मेट्रो, बस में 50 फीसदी सीटें कम कर दी हैं। 100 फीसदी लोग बाहर निकल रहे हैं लेकिन उनके लिए यातायात प्रतिबंध काफी मुश्किल हो रहा है।