राजधानी की मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम काटने के मसले पर बुधवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठन गई। नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मतदाताओं का नाम काटने के मसले पर दिल्लीवालों से झूठ बोल रहे हैं और सरकार चुनाव आयोग की रिपोर्ट छिपा रही है।
विजेंद्र गुप्ता के सवाल उठाने पर विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने चुनाव आयोग की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखवा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-2018 के बीच दिल्ली में 11.54 लाख वोटरों के नाम काटे गए और 18.44 लाख के जोड़े गए। विपक्ष ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया।
दरअसल, बीते साल 27 नवंबर को दिल्ली विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर सूची से लाखों मतदाताओं के नाम कटने की बात करते हुए चुनाव आयोग से रिपोर्ट तीन महीने में तलब की थी। बुधवार को यह अवधि खत्म हो रही थी। विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता ने इससे जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने 2015-2018 के बीच मतदाता सूची में जुड़े व हटाए गए मतदाताओं की संख्या पूछी। सरकार ने बताया कि चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंप दी है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जान-बूझकर जानकारी छिपाने की कोशिश में सदन में रिपोर्ट नहीं रख रही है। 14 दिसंबर को ही चुनाव आयोग ने जवाब दे दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। इस पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विजेंद्र गुप्ता को मिली रिपोर्ट पर सवाल किया।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बीच में दखल देते हुए रिपोर्ट को सदन के पटल पर रख दिया। इसके बाद सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। विपक्ष ने जानकारी छिपाने के आरोप में नियम 106(2) तथा 66 के अंतर्गत चुनाव मंत्री इमरान हुसैन पर सदन की अवमानना की कार्रवाई की मांग की।