तीनों नगर निगमों के भाजपा पार्षदों ने केजरीवाल सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से निगमों को पंगु बनाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए बुधवार को दिल्ली विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्षदों ने कहा कि 5वें दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्ट पूरी तरह लागू होती तो निगमों को निधि के संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
मंगलवार को दिल्ली सरकार की ओर से विधानसभा के पटल पर यह रिपोर्ट रखी गई थी। पूर्वी दिल्ली नगर निगम नेता सदन निर्मल जैन, उत्तरी निगम के तिलकराज कटारिया और कमलजीत सहरावत ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि निधि आवंटित नहीं किए जाने से निगमों की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। कुल टैक्स में से मौजूदा 12.5 की जगह 10.5 फीसदी अंश दिए जाने की वजह से भी निगमों को आर्थिक नुकसान का सामना करना होगा।
पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार विज्ञापनों पर 526 करोड़ रुपये खर्च करती है, लेकिन नगर निगमों के विकास कार्यों के लिए राशि देने के लिए तैयार नहीं है। इस मौके पर महापौर आदेश गुप्ता, नरेन्द्र चावला और बिपिन बिहारी सिंह, वीना विरमानी, शिखा राय और सत्यपाल सिंह ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस मौके पर पार्षदों ने दिल्ली सरकार के खिलाफ दिल्ली विधानसभा तक मार्च किया।