राजधानी में गंदे पानी की आपूर्ति बनी चुनौती, 20 प्रतिशत नमूने फेल
विनोद डबास
नई दिल्ली। राजधानी में हर घर को साफ और पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। एमसीडी की जांच में सामने आया है कि जलबोर्ड की ओर से सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूनों में से करीब 20 प्रतिशत मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
इस तरह हर पांचवें घर में पीने योग्य पानी नहीं है। एमसीडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि में 2255 नमूने लिए गए, जिनमें से 409 नमूने निम्न गुणवत्ता के पाए गए। इसी तरह इस वर्ष एक अप्रैल से 30 जून तक 870 नमूनों में से 174 नमूने फेल हुए। एमसीडी के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड की ओर से सप्लाई किए जाने वाले पानी के स्रोतों और घरों तक पहुंचने वाली लाइनों से नमूने लेकर जांच की जाती है। यह नमूने मुख्य रूप से जल की क्लोरीन की उपलब्धता, बैक्टीरिया की मौजूदगी और पीने योग्य मानकों के आधार पर जांचे जाते हैं। यदि पानी में क्लोरीन की मात्रा तय मानक से कम पाई जाती है, तो दिल्ली जल बोर्ड को तत्काल सूचित किया जाता है ताकि आपूर्ति में सुधार किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत यदि पीने का पानी दूषित पाया जाता है और उससे जन स्वास्थ्य को खतरा है, तो जलबोर्ड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति का दावा करने का भी अधिकार होता है। दरअसल जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना जहां सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, वहीं नमूनों के इतने बड़े स्तर पर फेल होना गंभीर चिंता का विषय है।