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ओल्ड फोर्ट डांस फेस्टिवल में क्लासिकल डांस का समागम

Tue, 08 Nov 2016 04:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली में साहित्य कला परिषद ने 4 से 8 नवंबर 2016 तक ओल्ड फोर्ट डांस फेस्टिवल का पुराना किला में आयोजन किया ,जिसमें क्लासिकल डांस स्टाइल्स को प्रस्तुत किया गया था। कार्यक्रम में रानी खानम और आमद डांस सेंटर की प्रस्तुति ने सबका मन मोहा।
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आमद डांस सेंटर ने 6 प्रस्तुतियां दी थीं, जिनको जानी-मानी कथक नृत्यांगना रानी खानम ने कोरियोग्राफ किया था। प्रस्तुतियों का विवरण इस प्रकार है -

यमुना नमः
यह श्री महाप्रभुजी द्वारा रचित यमुनास्तकम पर आधारित है। श्री यमुनाजी ने अपने भक्तों को आठ फोल्ड शक्तियों का आशीर्वाद दिया था और माना जाता है कि उनकी वंदना करने से भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। हिन्दू यमुना जी की पूजा करते हैं और मानते हैं कि महान नदी यमुना हिमालय में यमुनोत्री से निकलती है और कई हज़ार किलोमीटर की यात्रा के बाद इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम में समाहित हो जाती है। इस लंबी यात्रा के दौरान नदी का बहाव भी बदलता रहता है।

अंदाज़-ए-रक़्स
इस नृत्य प्रस्तुति में आवाज़ को विज़ुअलाइज़ करते हुए उसके ऑरल डाइमेंशन्स को फिज़िकल स्पेस में एक्सटेंड किया जाता है। इससे कथक डांस में पर्शियन सभ्यता के योगदान का पता चलता है। इसमें नृतकों का पहनावा पर्शियन पेंटिंग्स और साहित्य से प्रेरित होता है।
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अष्टपदी- श्री नंद नंदन नाचत सुधंग
सूरदास का श्री नंद नंदन नाचत सुधंग ताल रूपक और ताल तीनताल में कंपोज़ किया गया है और संगीत श्री अनिल बिस्वास का है। 'अष्टपदी' लखनवी स्टाइल के शानदार पहलुओं के कथक डांस पर आधारित है, यह कथक का ज़रूरी भाग है। गतनिकास ने सौन्दर्य और अलग शैली के माध्यम से कथक तकनीक में पर्शियन टच दिया है।

सरगम
हिंदुस्तानी संगीत में सरगम का अर्थ होता है शब्दों के बजाय नोट्स को गाना, ख्याल प्रस्तुति की तरह इसमें विभिन्न अलंकार जैसे कि मींद, गामक, कण और खटका का प्रयोग किया जाता है। यह अलाप और तान के बीच सेतु बनाने के लिए अक्सर मध्यम-टेम्पो में किया जाता है।
कथक नृत्य में सरगम का काफी महत्त्व है। इस वर्ज़न में राग बागेश्वरी के अर्द्धरात्रि रागों को गाया जाता है और नृतक पैरों की कठिन मुद्राओं और टर्न्स के माध्यम से इसको बेहतरीन बनाते हैं।

बसंत-होरी
बसंत के मौसम को पारंपरिक पीले रंग के खूबसूरत शेड्स के लिए जाना जाता है। बसंत के दस्तक देते ही हर खेत में सरसों लहलहाने लगता है, हवा की फिज़ा में ताज़गी भर जाती है और हर पेड़ पर चिड़ियों की मधुर वाणी सुनाई देने लगती है और बसंत के त्यौहार में आकाश कई रंगों से सज सा जाता है।
बसंत-होरी की रचना ताल तीनताल में भारत के आध्यात्मिक कवि हज़रत आमिर खुसरो ने की थी, यह बसंत बहार राग पर आधारित है। इसमें नृतक कथक डांस के ज़रूरी पहलुओं, नृत्त और नृत्य पर फोकस रखते हुए भावों को महत्त्व देता है।

नृत्य गति
नृत्य कहानी सुनाते हुए डांस और एक्शन को जोड़ता है। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह माहौल में भक्ति का रस घोल देता है। यह अपनी विशिष्ट शैलियों के लिए जाना जाता है जिसमें कठिन तत्कार और लड़ी (फुटवर्क्स) और चेहरे के भावों को प्रमुखता दी जाती है।

डांसर्स के नाम
रानी खानम, आकांक्षा गाइरोला, नेहा चौहान, जया भट्ट, रिधिमा बग्गा, कोमल खुशवानी, रिधिमा सिंह, सौम्या सिंह, निशा केसरी, शिखा शर्मा, शुभांगी देरहगवेन, फाल्गुन सैनी, सौम्या कोहली, शुभांगी आनंद, शुभांगी गोयल, तान्या अग्रवाल
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