नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को अब देशभर से समर्थन मिलने लगा है। बारिश और संसद मार्च के घटनाक्रम के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं। कॉकरोच नाम से पहचाने जा रहे प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर मैदान में डटे हुए हैं।
32वें दिन इस प्रदर्शन में बुधवार को उस समय नई ऊर्जा देखने को मिली, जब मराठा आंदोलन के नेता मनोज जारांगे पाटिल ने अभिजीत दीपके से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। खराब मौसम भी प्रदर्शनकारियों के इरादों को कमजोर नहीं कर सका।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन की ताकत सबसे बड़ी होती है। यहां मौजूद छात्रों और युवाओं को किसी भी हालत में विरोध-प्रदर्शन वाली जगह से नहीं हटना है, नहीं तो सरकार इस आंदोलन को कुचल देगी। उन्होंने कहा कि जब वह अपने गांव अंतरवली में आंदोलन कर रहे थे, तब महिलाओं और बुजुर्गों पर भी जानलेवा हमला किया गया था।
सरकार ने हम पर गोलियां तक चलवाई थीं। उन्होंने सभी छात्रों से कहा कि यह जगह मत छोड़िए। पूरा देश आपके साथ खड़ा है। मनोज जरांगे ने मराठी में भाषण दिया। अभिजीत दीपके ने उनके भाषण का हिंदी अनुवाद किया। इसके अलावा, शाम तक किसान नेता राकेश टिकैत, आप के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज और अन्य नेताओं का आना-जाना लगा रहा।
मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में मेट्रो के कई स्टेशन बंद होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सीजेपी के समर्थकों के साथ छात्र, बुजुर्ग और महिलाएं भी प्रदर्शन स्थल पर नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रास्ते में आई परेशानियां उनके हौसले को कमजोर नहीं कर पाईं। कई लोग अपने जरूरी काम पूरे करने के लिए वापस घर जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि वे दोबारा जंतर-मंतर लौटकर आंदोलन में शामिल होंगे। प्रदर्शन के बीच लुटियंस दिल्ली में सरकार की ओर से शाम 7:16 मिनट पर अगले आदेश तक इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है।
इंस्टाग्राम हैंडल बैन, कुछ देर बाद अकाउंट रिस्टोर
दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच-बीच से बड़ी खबर सामने आई। बताया गया कि इंस्टाग्राम हैंडल बैन हो गया है। जिसके बाद अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया। लेकिन कुछ देर बाद ही इंस्टाग्राम हैंडल से बैन हट गया और अकाउंट रिस्टोर हो गया।
सोनम वांगचुक ने जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखा पत्र
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने और मेरा अनशन खत्म करने की आपकी ईमानदार अपील के लिए धन्यवाद। हमारी बातचीत के दौरान, आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार उन छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी, जिन्होंने परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। साथ ही, जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा की जाएगी, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल है।
सीजेपी ने की सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील
परीक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षा न्याय की मांग को लेकर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से सीजेपी ने भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि छात्रों के हित में शुरू किया गया यह आंदोलन अपनी जगह जारी रहेगा, लेकिन सोनम सर का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है। पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सोनम सर का संघर्ष हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बना है। इसलिए अब उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए अनशन खत्म कर देना चाहिए।
पत्र में 20 जुलाई के घटनाक्रम का भी जिक्र किया गया है। पार्टी ने कहा कि उस दिन देश के कई राज्यों से बड़ी संख्या में युवा सोनम सर के समर्थन में पहुंचे थे। इससे यह साबित हुआ कि परीक्षा न्याय की मांग अब सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों छात्रों की आवाज बन चुकी है। सीजेपी ने अपने पत्र में भरोसा दिलाया कि सोनम सर के अनशन समाप्त करने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। पार्टी ने कहा कि वह परीक्षा न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आगे भी जारी रखेगी।
सीजेपी ने नड्डा के आवास पर बातचीत से किया इन्कार
सीजेपी ने केंद्र सरकार के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि किसी नेता के निजी आवास पर नहीं, बल्कि जनता के बीच बातचीत होनी चाहिए। बुधवार को सौरव दास ने दावा करते हुए बताया कि उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि अगर बातचीत करनी है, तो वह जंतर-मंतर पर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे। दास ने बताया कि आंदोलनकारी केवल औपचारिक बातचीत नहीं चाहते, बल्कि सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस आश्वासन के बातचीत का कोई मतलब नहीं है।
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर मिले जूते-चप्पल किए गए प्रदर्शित
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद मची अफरा-तफरी में छूटे जूते और चप्पलों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए इस प्रदर्शन के जरिये बताया गया कि कार्रवाई के दौरान कई लोग जल्दबाजी में अपना सामान वहीं छोड़कर चले गए थे।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में एसएफआई का 24 जुलाई से हड़ताल का एलान
छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर छात्रों के साथ कथित रूप से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। संगठन ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए 24 जुलाई को देशभर में छात्र हड़ताल और कक्षाओं के बहिष्कार का आह्वान किया है। एसएफआई का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस, रबर की गोलियां और पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए।
वह पुलिस कार्रवाई के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेगा। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन, रैलियां और नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी। 23 जुलाई को संगठन कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर राजभवनों और सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेगा। संगठन ने 24 जुलाई को रात 10 बजे से ‘रात जागो, देश जागो’ नाम से देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। इसके तहत मशाल जुलूस, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सभाएं होंगी। इसके अलावा 25 और 26 जुलाई को ‘रिटर्न गिफ्ट’ अभियान के तहत पुलिसकर्मियों को मेलोडी टॉफी देने और प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरों के जरिये जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।