मंत्रालय ने 2018 में कचरा मुक्त शहर का प्रोटोकाल विकसित किया था। इसके संशोधित संस्करण को मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ने लांच किया। इसमें शहरों की जल संग्रहण क्षेत्र व नालों की सफाई व उससे निकले कचरे निपटान, प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन, निर्माण कार्यों से निकले कचरे के निपटान से जुड़े कई प्रावधान हैं, जिसके आधार पर रेटिंग दी जाती है।
तीन चरणों में पूरी होती शहरों की पहचान
पहले चरण में शहर खुद आवेदन करते हैं। इसके लिए उन्हें अपने पोर्टल पर ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी जानकारियां अपलोड करनी होती हैं। दूसरे चरण में थर्ड पार्टी से शहरी निकायों के इन दावों का आकलन किया जाता है। तीसरे चरण में आम लोगों के फीडबैक व फील्ड सर्वेयर जमीनी हकीकत की जानकारी लेते हैं। इसके बाद रेटिंग दी जाती है।
ये हुई प्रक्रिया
-2020 की स्टार रेटिंग में 1.19 करोड़ लोगों ने दिया फीडबैक
-10 लाख से ज्यादा जियो-टैगिंग तस्वीरों की ली गई मदद
-5175 ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्रों का 1210 फील्ड सर्वेयर ने किया मुआयना