केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के सांसद चिराग पासवान ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिसमें सांसद पशुपतिनाथ पारस की अगुवाई वाली लोजपा को मान्यता दी गई है। उन्होंने दायर याचिका में जल्द सुनवाई का आग्रह किया है। याचिका पर 9 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में कहा गया है कि लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष अभी भी चिराग पासवान है और उन्होंने पार्टी विरोधी और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने के कारण पशुपति कुमार पारस को निष्कासित कर दिया था।
याचिका के अनुसार पार्टी ने इस तथ्य की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दे दी थी। बावजूद इसके लोकसभा अध्यक्ष ने पशुपति पारस के आवेदन को स्वीकार कर उनको मान्यता प्रदान प्रदान की। यह सरासर गैरकानूनी निर्णय है।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल 75 सदस्य हैं। इसमें 66 सदस्य याची के साथ हैं। सभी का एफिडेविट भी पार्टी के पास है। चाचा पशुपति कुमार पारस के पास कोई ठोस आधार नहीं है।
लोजपा में 13 जून की शाम से कलह शुरू हुई थी और 14 जून को चिराग पासवान को छोड़ बांकी पांचों सांसदों ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई थी। इसमें हाजीपुर सांसद पशुपति कुमार पारस को संसदीय बोर्ड का नया अध्यक्ष चुन लिया गया था।
इसकी सूचना लोकसभा स्पीकर को भी दे दी गई। 14 जून की शाम तक लोकसभा सचिवालय से उन्हें मान्यता भी मिल गई थी। इसके बाद चिराग पासवान ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पांचों बागी सांसदों को लोजपा से हटाने की अनुशंसा कर दी।