अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों के संबंध में कुछ भी बताने में असमर्थ रहा है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि आधार कार्ड और पैन कार्ड प्राप्त करने में अभियुक्त द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेज जाली दस्तावेज थे।
अदालत ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाने व अन्य आरोप में एक चीनी नागरिक को जमानत प्रदान कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने आरोपी लुओ सांग को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व समान राशि के दो-दो मुचलके पेश करने पर जमानत दे दी है।
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लुओ सांग को जुलाई में प्रवर्तन निदेशालय के एक मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। उन पर अवैध रूप से भारत में रहने और एक भारतीय महिला से शादी करके पासपोर्ट हासिल करने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा उक्त पैन कार्ड और आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए उपयोग किए गए दस्तावेजों को आज तक संबंधित आईओ द्वारा जब्त नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों के संबंध में कुछ भी बताने में असमर्थ रहा है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि आधार कार्ड और पैन कार्ड प्राप्त करने में अभियुक्त द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेज जाली दस्तावेज थे। आरोपी की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि वर्तमान मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है, ऐसे में उनके मुवक्किल को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल विशेष रूप से वर्तमान महामारी की स्थिति के दौरान जरूरतमंद भारतीय नागरिकों की मदद करने के लिए बड़े पैमाने पर परोपकारी कार्य कर रहा है। अदालत ने आरोपी की जमानत स्वीकार करते हुए कहा कि लुओ सांग 170 दिनों से हिरासत में है और उसके खिलाफ सबूत पहले से ही जांच एजेंसी के पास है। मुकदमे में समय लग सकता है और उसके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास की कोई संभावना नहीं है।