गरीब जनता को सिर्फ राशन चाहिए। उसे किसी योजना के नाम से कोई लेना-देना नहीं है। डोर स्टेप राशन डिलीवरी योजना पर केंद्र सरकार द्वारा रोक लगाना सिर्फ श्रेय लेने की होड़ है। केंद्र की मोदी व दिल्ली की केजरीवाल सरकार नाम की लड़ाई पर योजनाएं बना रही हैं। सच्चाई यह है कि फूड सिक्योरिटी एक्ट कांग्रेस की यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बनाया था, ताकि सभी गरीबों को खाना मिल सके। यह बातें प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मंत्री हारुन यूसुफ ने कहीं।
प्रेसवार्ता कर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि बिना टेंडर के ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कैसे पता था कि राशन कौन बांटेगा। इसमें सरकार के बड़े भ्रष्टाचार के संकेत है, इसकी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस के फूड सिक्योरिटी एक्ट को अपना बताया जा रहा है। कोरोना काल में फ्री राशन देने की बात करना भी गरीबों का मजाक उड़ाना था। एक्ट के तहत सभी को खाद्य का अधिकार दिया था।
कांग्रेस सरकार 31 लाख परिवारों को राशन देती थी। गरीब और असहाय लोग जो राशन की श्रेणी में नही आते थे उनके लिए अन्नश्री योजना थी। इसके तहत एक लाख लोगों को मुफ्त राशन या उसका पैसा सीधा उनके खातों में जमा किया जाता था, जिसे केजरीवाल सरकार ने बंद कर दिया। अब सिर्फ 17 लाख परिवारों को ही राशन मुहैया कराया जा रहा है।
राशन की दुकानें अब प्रतिदिन नहीं खुलती हैं और मिलावटी राशन के लिए पूरा दिन लोगों खड़े रहना पड़ता है। 11.49 लाख परिवार नए राशन कार्ड बनने का इंतजार अब भी कर रहे हैं। 461 राशन की दुकानों को भी बंद कर दिया गया है। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष अली मेंहदी और परवेज आलम मौजूद रहे।