नई दिल्ली। मिड डे मील (एमडीएम) योजना के तहत दिल्ली सरकार को 27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। यह जवाब केंद्र सरकार की ओर से मिड डे मील संबंधी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में दिया गया। जनहित याचिका में अनुरोध किया गया था कि लॉकडाउन में स्कूल बंद होने के दौरान विद्यार्थियों को पका हुआ मध्याह्न भोजन या खाद्य सुरक्षा भत्ता मुहैया कराया जाए।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ को केंद्र ने सूचित किया कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए केंद्रीय सहायता के तौर पर 27.17 करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि 29 अप्रैल को नौ करोड़ रुपये और एक मई को 18 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी गई। केंद्र ने शपथपत्र दायर करने के लिए अदालत से समय देने का अनुरोध किया।
पीठ ने 30 जून को केंद्र से पूछा था कि उसने मध्याह्न भोजन के लिए धन कब और किस महीने में हस्तांतरित किया और दिल्ली सरकार को कब यह राशि मिली। इसके जवाब में केंद्र ने यह जानकारी दी।
वहीं दिल्ली सरकार के वकील ने भी प्रति उत्तर के लिए समय मांगा।
पीठ ने कहा कि 30 जून के आदेश के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया और उसने केंद्र एवं दिल्ली सरकार को हलफनामे दायर करने का आखिरी मौका देते हुए अगली सुनवाई के लिए 7 अगस्त की तारीख तय की है। यह जनहित याचिका ‘महिला एकता मंच’ नामक गैर सरकारी संगठन की ओर से दायर की गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसका मकसद महामारी के दौरान गरीब बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाना है। दिल्ली सरकार ने 30 जून को कहा था कि बच्चों को स्कूलों में मध्याह्न भोजन देने के लिए अभी उसे राशि प्राप्त नहीं हुई है। इस पर अदालत ने कहा था कि मध्याह्न भोजन के लिए बच्चों को महीनों तक इंतजार कराना सही नहीं है। इसलिए इस सम्बन्ध में जल्द कदम उठाने की जरूरत है।