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कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में महाराष्ट्र की कंपनी और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप तय

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नई दिल्ली। अदालत ने कोयला आवंटन घोटाला मामले में महाराष्ट्र की एक कंपनी तथा उसके तीन पूर्व अधिकारियों पर कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत शुक्रवार को आरोप तय कर दिए। मामला वर्ष 2005 में महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मार्की मंगली-द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ में कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
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राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने आरोपी कंपनी टॉपवर्थ ऊर्जा एंड एएमपी मेटल्स लिमिटेड और उसके तीन पूर्व पदाधिकारियों अनिल कुमार सक्सेना, मनोज माहेश्वरी और आनंद नंद किशोर सारदा पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप तय किए। इस कंपनी को पहले श्री वीरांगना स्टील लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। इसे टॉपवर्थ समूह को बेचे जाने के बाद नाम बदल गया।
कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा यह स्पष्ट है कि कंपनी और उसके पूर्व पदाधिकारियों ने कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रची थी। आरोपियों ने गलत बयानी भी की। आरोपी आनंन नंद किशोर शारदा ने कई फर्जी लेटर लिखकर उनका प्रयोग अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया। आरोपियों ने कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए यह आपराधिक साजिश रची।
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वहीं इस मामले में कोर्ट ने कंपनी के तीन वर्तमान अधिकारियों सुरेन्द्र चंपालाल लोढ़ा, अनिल ओमप्रकाश नेवातिया और स्वप्न कुमार मित्रा को साक्ष्यों के अभाव में छोड़ दिया। इन अधिकारियों के वकील पीके दुबे ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किलों ने कंपनी का नाम बदलने के संबंध में सरकार को सूचित किया था। कंपनी के पुराने और नए अधिकारियों के बीच कोई संबंध या साजिश नहीं है।
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