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समलैंगिक विवाह नागरिकों के अधिकार से जुड़ा मामला : हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। समलैंगिक दो जोड़ों की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि यह नागरिकों के अधिकार से जुड़ा मामला है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और प्रतीक जालान की पीठ द्वारा केंद्र को जारी नोटिस में कहा गया है कि यह कोई साधारण याचिका नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि इस मामले को गंभीरता से लें। यह नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अधिवक्ता अरुंधति काटजू व अन्य ने पीठ के समक्ष दलीलें पेश कीं। सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार के वकील ने कहा कि सनातन धर्म के पांच हजार साल के इतिहास में इस प्रकार का मामला सामने नहीं आया है। पीठ ने अगली सुनवाई 8 जनवरी 2021 के लिए सूचीबद्ध कर दी है।
महिलाएं बोलीं, कई अधिकारों के लिए करता पड़ता है संघर्ष
एक याचिका महिला जोड़े की ओर से दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि वे दोनों आठ साल से साथ रह रही हैं और एक-दूसरे से प्यार करती हैं। दोनों साथ मिलकर जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं, मगर वे विवाह नहीं कर सकती हैं। क्योंकि, दोनों महिला हैं। दोनों महिलाओं (47 और 36 वर्ष) ने कहा कि सामान्य विवाहित जोड़े के लिए जो बातें सरल होती हैं, जैसे- संयुक्त बैंक खाता खुलवाना, परिवार स्वास्थ्य बीमा लेना आदि, उन्हें इसके लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। संविधान का अनुच्छेद-21 अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के अधिकार की रक्षा करता है और यह अधिकार विषम लिंगी जोड़ों की तरह ही समलैंगिक जोड़ों पर भी पूरी तरह लागू होता है। याचिका में उन्होंने कालकाजी के एसडीएम को कानून के तहत उनका विवाह पंजीकृत करने का आदेश देने की भी मांग की है।
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पुरुषों की दलील, हम कर चुके हैं विवाह
दूसरी याचिका एक समलैंगिक पुरुष जोड़े की ओर से दायर की गई है। दोनों का कहना है कि उन्होंने न्यूयॉर्क में विवाह किया था, लेकिन समलैंगिक होने के कारण भारतीय वाणिज्य दूतावास ने विदेशी विवाह अधिनियम, 1969 के तहत उनकी शादी का पंजीकरण नहीं किया। उन्होंने याचिका में अपनी शादी का पंजीकरण करने का आदेश देने की मांग की है। उनकी मांग है कि समलैंगिक विवाह को सरकार द्वारा मान्यता दी जाए और विशेष विवाह अधिनियम और विदेशी विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत शामिल किया जाए।
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