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भय का वातावरण: पटरी पर लौट रहे कारोबार पर फिर कोरोना का दंश, वीकेंड कर्फ्यू को हताश दिखे व्यापारी

Fri, 16 Apr 2021 01:33 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

त्योहारी सीजन में पटरी पर लौट रहे कारोबार पर फिर से कोरोना का दंश छा गया है। नाइट कर्फ्यू से व्यापार जगत परेशान था ही अब वीकेंड कर्फ्यू की वजह से आर्थिक जगत की कमर फिर से टूटने का अंदेशा है। 
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दिल्ली में पिछले साल जनता कर्फ्यू की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्योहारी सीजन में पटरी पर लौट रहे कारोबार पर फिर से कोरोना का दंश छा गया है। नाइट कर्फ्यू से व्यापार जगत परेशान था ही अब वीकेंड कर्फ्यू की वजह से आर्थिक जगत की कमर फिर से टूटने का अंदेशा है। हालांकि कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण को लेकर व्यापारियों में भी भय का वातावरण है। हताश व्यापारियों के एक वर्ग का तो यहां तक कहना है कि संपूर्ण लॉकडाउन ही रहे तो बेहतर।

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कई व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों का तो यहां तक कहना है कि रविवार शाम तक दिल्ली में कोरोना संक्रमण के आंकड़ों को देखेंगे अगर दो दिन तक कर्फ्यू से संक्रमण के मामले कम होते हैं तो वह मंगलवार से बाजार खोलेंगे। वहीं कुछ व्यापारिक संगठनों का कहना है कि दिल्ली सरकार की विफलता है। एक तरफ से चुनाव में भीड़ को रोकने पर सभी चुप्पी साधे हुए है दूसरी तरफ व्यापारियों का रोजगार छीन रहे है। यह पूरी तरह से प्रशासन की विफलता है। 

सबसे बड़ी परेशानी तो उन मार्केट की है जो सोमवार को बंद रहती है। इनमें मुख्य रूप से करोल बाग, कमला नगर, साउथ एक्स, लाजपतनगर, किंग्सवें कैंप शामिल है। ऐसे में इन मार्केट को तीन दिनों के लॉकडाउन का दंश झेलना पड़ेगा।
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प्रशासन की विफलता है
वीकेंड कर्फ्यू एक तरह से प्रशासन की विफलता है। चुनावी रैली पर तो किसी की रोक नहीं है। नेता मंदिर-मस्जिद पर तो बोलते हैं, लेकिन कोरोना से कैसे निपटा जाए इसे लेकर तंत्र नहीं विकसित किया जाता है। वीकेंड लॉकडाउन व्यापार व अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला निर्णय है। -संजीव मदान, सेक्रेटरी ट्रेडर्स एसोसिएशन लाजपतनगर मार्केट

तीन दिनों का लॉकडाउन से बेहाल होंगे व्यापारी

पूरे सप्ताह ग्राहक नहीं है बाजार में। वीकेंड पर बाजार की स्थिति बेहतर रहती है। अच्छा है कि व्यापारी पूरे सप्ताह ही घर पर बैठे रहे और रोजगार को बंद कर दें। पहले से ही व्यापार की स्थिति बेहतर नहीं है। अब शनिवार व रविवार बंद होने की वजह से व्यापारी फंस जाएंगे। करोल बाग, कमला नगर, साउथ एक्स, लाजपतनगर, किंग्सवें कैंप समेत कई बाजार सोमवार को बंद रहते है। ऐसे में तीन दिनों का लॉकउाउन इन मार्केट के लिए हो जाएगा। -मुरली मनी, अध्यक्ष करोल बाग मार्केट एसोसिएशन

कर्फ्यू को बेहतर कदम तो नहीं कह सकते, लेकिन जिस तरह से संक्रमण बढ़ रहा है वैसे इसकी जरूरत थी। रोजगार पर तो असर पड़ेगा ही क्योंकि कमला नगर में तीन दिनों का लॉकडाउन हो जाएगा, लेकिन जान बच जाए तो वहीं बेहतर। व्यापारियों को सरकार का साथ देना ही होगी। हालांकि इस कदम से व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी। -नरेश सांबर, अध्यक्ष जवाहर नगर, कमला नगर रजिस्टर ट्रेडर्स एसोसिएशन

कोरोना का मामला भयावह
कोरोना के मामले भयावह है। अगर सरकार केइस फैसले से कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है हम इसके साथ है। वैसे भी सप्ताहांत में बाजार में कारोबार कम ही रहता है। वीकेंड कर्फ्यू से संक्रमण रूक जाए तो बेहतर नहीं तो एक सप्ताह के लॉक डाउन पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। संक्रमण के चेन को तोडना बेहद आवश्यक है। -राजेंद्र शर्मा, महामंत्री फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन

राहत की तरह मिली है
संक्रमण को रोकना बेहद ही आवश्यक है। वीकेंड पर बाजार अक्सर बंद ही रहता है। ऐसे में कई लोग धार्मिक स्थल चले जाते हैं। वीकेंड पर कर्फ्यू लगने से चेन को तोड़ा जा सकता है। ग्राहक वैसे भी बाजार में काफी कम हैं। करीब 48 घंटे के लॉकडाउन से लोगों को राहत की सांस नजर आ रही है। -टोनी चावला, महासचिव जनपथ मार्केट एसोसिएशन 

उद्यमियों की परेशानी बढ़ी, मझोले व कुटीर उद्योग की स्थिति खराब होगी
पिछले साल लॉकडाउन की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट ठप पड़ा तो अब वीकेंड कफ्यू की वजह से परेशानी बढ़ेगी। उद्यमियों का कहना है कि धीरे-धीरे ही सही प्रोडक्शन यूनिट शुरू ही हुई थी कि अब फिर से लॉक डाउन की स्थिति है। सरकार के इस फैसले से रोजगार पर भी असर पड़ेगा व मजदूरों का पलायन भी शुरू हो जाएगा। मझोले व कुटीर उद्योग की कमर और अधिक टूटेगी। 

क्या कहते हैं उद्यमी
मझोले व कुटीर उद्योग की कमर पहले से ही टूटी पड़ी है। बची-खुची कमर  लॉकडाउन व किसानों के सड़क जाम ने पूरी कर दिया। किसानों के आंदोलन की वजह से दिल्ली के उद्यमी काफी परेशान हुए। अब नये सिरे से लगने वाले वीकेंड कर्फ्यू की वजह ना केवल फैक्टरी पर ताला लगेगा बल्कि रोजगार भी कम होगा और मजदूर पलायन भी करना शुरू कर देंगे। धातु और प्लास्टिक के दाम बढ़ने से वैसे ही प्रोडक्शन काफी कम हो गया है। -संतोष राय, उद्यमी

व्यापारियों के प्रति सरकार लापरवाह
व्यापारियों के प्रति सरकार लापरवाह है। पहले किसान आंदोलन को समर्थन देकर फैक्टरी को बंद रखने पर मजबूर होना पड़ा तो अब वीकेंड कर्फ्यू की वजह से। लॉकडाउन लगना चाहिए, लेकिन पिछले साल की हालात को देखते हुए सरकार को उद्यमियों को राहत देने के बारे में भी सोचना चाहिए। उद्यमी सिर्फ फैक्टरी नहीं चलाते बल्कि रोजगार भी देते है। -निरंजन पोद्दार, उद्यमी 

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