कोरोना काल में केंद्र सरकार देश के लिए एक सकारात्मक बजट पेश किया है। इससे मंदी से उबरने में मदद मिलने के साथ-साथ राजघोषीय घाटे को कम करने में भी मदद मिलेगी। खास बात यह कि महामारी के दौर में आए बजट में भी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने समेत बुनियादी ढांचे के विस्तार के बजटीय आवंटन करके साहसिक कदम उठाया है। वहीं, बजटीय घाटे का नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा है।
नई केंद्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना की घोषणा सही दिशा में उठाया गया कदम है। इससे न सिर्फ मौजूदा महामारी से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं, आने वाली विपदाओं से भी निपटा जा सकेगा। स्वास्थ्य पर आवंटन दुगुना किया गया है। इसके साथ नई स्क्रैपिंग नीति और सार्वजनिक परिवहन को मजबूती देने के लिए बजट में किए गए प्रावधानों को मिलाकर देखें तो अगले कुछ सालों में इसका असर भी जमीन पर दिखने लगेगा। इसका बड़ा फायदा दिल्ली-एनसीआर को होने जा रहा है।
वरिष्ठ नागरिकों को इस बजट से राहत मिली है। अब उनको अपनी पेंशन और ब्याज से होने वाली आय पर रिटर्न फाइल नहीं करने के झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा। वह बेवजह की औपचारिकताओं से बच जाएंगे। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में इस तरह के वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनको इसका फायदा मिलेगा। हालांकि, इनकम टैक्स के स्लैब में दूसरे कोई बदलाव न होने से आम लोगों पर न तो कोई अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा और न ही कोई राहत मिलने नहीं जा रही है।
बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करना एक साहसिक कदम है। इससे बीमा कंपनियों में पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कंपनियों के विस्तार को मदद मिलेगी। इसके अलावा नकारात्मक ग्रोथ रेट से सबसे बड़ी मुश्किल घाटे का संभाल पाना था। मौजूदा वित्त वर्ष में वित्तीय घाटा 9.4 फीसदी था। अगले वर्ष 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
नोट: आर्थिक विशेषज्ञ रविंद्र झा की संतोष कुमार से बातचीत के आधार पर