उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित इहबास (मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान) अस्पताल में मिलने वाली सरकारी दवाइयों की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। सहारनपुर से बेटे को दिखाने आई महिला को अस्पताल में एक महंगी दवाई नहीं मिली। महिला को एक मेडिकल स्टोर का पता बताया गया। पीड़िता वहां पहुंची तो उसे केवल अस्पताल में फ्री मिलने वाली दवाई के लिए उसे 1600 रुपये चुकाने के लिए कहा गया।
महिला ने थोड़ी बातचीत की तो 1200 रुपये लेकर उसे दवाई दे दी गई। लेकिन दवाई के रेपर पर सिर्फ इहबास के लिए, बिक्री के लिए नहीं लिखा था। महिला को इसका पता चला तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। छानबीन के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। उधर मेडिकल स्टोर मालिक दुकान बंद कर फरार हो गया। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात की है।
जानकारी के अनुसान मूलरूप से सहारनपुर की रहने वाली रानी बेगम (55) नामक महिला अपने बेटे परवेज (34) को इलाज के लिए इहबास लाई थी। वह पहले भी अस्पताल दिखाने आ चुकी है। डॉक्टर को दिखाने के बाद रानी ने बेटी की दवाई अस्पताल से लेने के लिए पर्चा दिया। अस्पताल के काउंटर से उसे दवाईयां दे दी गई, लेकिन एक दवाई के लिए उसने बाहर किसी मेडिकल स्टोर पर जाने के लिए कहा गया।
पहले भी यह दवाई अस्पताल में नहीं मिली थी। उस समय भी महिला ने 1200 रुपये देकर उसे लिया था। महिला मेडिकल स्टोर पर पहुंची तो दवाई देकर आरोपी ने 1600 रुपये देने की बात की। रानी ने कहा कि पिछली बार तो यह 1200 की थी। इस बात पर मेडिकल स्टोर मालिक ने 1200 रुपये ही देने के लिए कहा। महिला ने रुपये देकर दवाई ले ली।
महिला के बेटे परवेज ने जब दवाई को देखा तो उस पर इहबास अस्पताल की मोहर लगी थी। उस पर लिखा था कि दवाई बिक्री के लिए नहीं है। परवेज ने यह बात अपनी मां को बताई। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। छानबीन के बाद पुलिस ने शनिवार को इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस दवाई बेचने वाले मेडिकल स्टोर मालिक व अस्पताल से दवाई बेचने वालों की तलाश कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की है।