गौतम गंभीर ने कहा कि यदि किसी वितरक से प्राप्त की गई फैबिफ्लू के कुछ 100 पत्ते जरूरतमंदों को मुफ्त में दी जा रही है तो क्या इसे जमाखोरी कहा जा सकता है? कहने वाले मुझे गलत कह सकते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए मैं सब कुछ करूंगा।
ऑक्सीजन के बाद अब कोरोना मरीजों के इलाज में वरदान साबित हो रहे टैबलेट फैबिफ्लू को लेकर दिल्ली में आप और भाजपा आमने-सामने आ गई है। दरअसल भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने अपने कार्यालय में कुछ जरूतमंद लोगों में यह दवाई मुफ्त में वितरित की। जिसके बाद आप ने गौतम गंभीर पर जमाखोरी का आरोप लगाया है।
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गौतम गंभीर ने जवाब देते हूए कहा कि यदि किसी वितरक से प्राप्त की गई फैबिफ्लू के कुछ 100 पत्ते जरूरतमंदों को मुफ्त में दी जा रही है तो क्या इसे जमाखोरी कहा जा सकता है? लोगों को यह दवाई नहीं मिल रही है, काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अगर ये दवाई मुफ्त वितरण कर लोगों की जान बचाने में मदद की है तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि कहने वाले मुझे गलत कह सकते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए मैं सब कुछ करूंगा।
सांसद गंभीर ने कहा कि दिल्ली मेरा घर है और मैं अपनी आखिरी सांस तक लोगों की सेवा करता रहूंगा। बेड, ऑक्सीजन और दवाई के लिए लोग परेशान हैं। हम लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव मदद कर रहे हैं। वहीं इससे पहले गौतम गंभीर ने बुधवार को ट्वीट किया था कि पूर्वी दिल्ली के लोग उनके कार्यालय जागृति एन्कलेव से 10:00 बजे से पांच बजे तक फैबिफ्लू (Fabiflu) मुफ्त में ले सकते हैं। इसके लिए अपना आधार कार्ड और डॉक्टर की पर्ची साथ लेकर आने की बात कही थी।