भारतीय किसान यूनियन ( अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार यदि संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता को न्यौता भेजेगी तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। सरकार से वार्ता वहीं से शुरू होगी, जहां 22 जनवरी को रुकी थी। तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी , एमएसपी के लिए कानून पर बात होगी। किसानों के मुद्दे वहीं रहेंगे। यह बातें राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार के कृषि मंत्री की ओर से आए बयान के जबाब में कहीं।
रविवार को चौधरी राकेश टिकैत सिंघु बार्डर पर आयोजित सर्वखाप पंचायत में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस पर किसानों का मोर्चों संविधान बचाओ दिवस मनाएगा।
उससे पहले 13 अप्रैल को आंदोलन के सभी मोर्चों पर खालसा पंथ स्थापना दिवस मनाया जाएगा और जलियांवाला बाग कांड की बरसी पर शहीदों को याद किया जाएगा।
कृषि मंत्री के बयान के सवाल पर चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार जैसे 22 जनवरी से पहले संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता का न्यौता भेजती रही है, उसी तरह न्यौता भेजेगी, तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। वार्ता के मुद्दों के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि वार्ता के मुद्दे पहले वाले ही रहेंगे।