राजधानी में दौड़ रही बसें ही दिल्ली में लंबा जाम लगाती हैं। सड़क पर बस खराब हो गई तो उसे कई घंटों तक नहीं हटाया जा सकता है। क्योंकि, उसके पहिए जाम हो जाते हैं। क्रेन के जरिए भी बस को नहीं हटाया जा सकता। इससे लंबा जाम लगना शुरू हो जाता है।
मंगलवार को संसद के पास लगे लंबे जाम की वजह भी डीटीसी बस थी। उसे मौके से करीब तीन घंटे बाद हटाया जा सका था। इस जाम को लेकर दिल्ली पुलिस के तत्कालीन कार्यवाहक पुलिस आयुक्त बालाजी श्रीवास्तव को ट्वीट करना पड़ा और उन्होंने अपनी ही ट्रैफिक पुलिस पर सवाल उठाए थे।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में औसतन हर रोज 30 बसें खराब होती हैं। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) मुक्तेश चंदर ने बताया कि डीटीसी व क्लस्टर की जो नई बसें आई हैं उनमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर वह सड़क पर खराब हो जाती हैं तो उनके पहिए जाम हो जाते हैं। ये समस्या हाल ही में आई लो फ्लोर बसों में है। पहली बसों में यह समस्या नहीं थी। इसलिए इन बसों को क्रेन से नहीं खींचा जा सकता है। मौके पर ही ठीक कर इन बसों को सड़क से हटाया जा सकता है।
इससे जबरदस्त जाम लग जाता है। विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया कि संसद के पास डीटीसी बस की बैटरी खराब हो गई थी। इस कारण बस बीच सड़क पर खराब हो गई थी। संसद मार्ग सर्किल का ट्रैफिक इंस्पेक्टर अपनी कार से बस की बैटरी लेकर आया और बस को स्टार्ट कर मौके से हटाया गया था। बस को हटाने में करीब तीन घंटे का समय लग गया था।
मुक्तेश चंदर ने बताया कि वह इस समस्या को दूर करने के लिए डीटीसी व डिम्स को पत्र लिखने जा रहे हैं।
साथ ही वह जल्द ही डीटीसी व डिम्स के अधिकारियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। अगर अब बीच सड़क पर बस खराब होती है तो उसे दो बड़ी क्रेनों से खींचा जाएगा। भले ही बस के पहिए खराब हो जाए। ट्रैफिक पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इस समस्या को लेकर डीटीसी व डीम्स को कई बार पत्र लिख चुका है, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।