शेतकारी संगठन के मुखिया और कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सदस्य अनिल घनवट ने कृषि क्षेत्र में सुधारों को जरूरी बताते हुए इसके समर्थन में दिल्ली में एक लाख किसानों का जमावड़ा लगाने की घोषणा की है। घनवट ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की मांग को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र का भला मुक्त बाजार व्यवस्था के बिना संभव नहीं है।
घनवट ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी की सरकार की निराशाजनक घोषणा के बाद कमेटी की रिपोर्ट का अब कोई मतलब नहीं है। हालांकि रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र के भले के लिए की गई सिफारिशें बहुत काम की है। घनवट ने देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिख कर कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
किसानों का कराएंगे दिल्ली कूच
घनवट ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार की नितांत आवश्यकता है। सरकार ने अपना राजनीतिक हित साधने केलिए तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। अब मैं कृषि क्षेत्र में सुधारों को लागू करवाने केलिए पूरे देश की यात्रा करुंगा। कुछ महीने बाद एक लाख किसान दिल्ली में सुधारों की मांग पर डेरा डालेंगे।
रिपोर्ट सार्वजनिक होती तो यह स्थिति नहीं आती
घनवट ने कहा कि आठ महीने तक रिपोर्ट पर कुछ नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के रवैये से वह निराश हैं। अगर इसे सही समय पर सार्वजनिक कर दिया जाता तो यह स्थिति नहीं आती। दरअसल रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सभी पक्षों से बातचीत कर कई अहम सिफारिशें की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट को अब भी रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए।
श्वेत पत्र जारी करने की मांग
घनवट ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए नए कानून की जरूरत है। इसके लिए श्वेत पत्र तैयार करने केलिए एक कमेटी का गठन होना चाहिए। सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कदम उठाने चाहिए। कानूनों के रद्द होने के बाद कृषि क्षेत्र में सुधार का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।
एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग अव्यवहारिक
आंदोलनरत किसान संगठनों की एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग को उन्होंने अव्यवहारिक बताया। घनवट ने कहा कि वह एमएसपी के खिलाफ नहीं है, मगर इसका दायरा सीमित होना चाहिए। मुख्य चीज सुधार है। कृषि क्षेत्र को खुला बाजार चाहिए। किसानों को बड़ा बाजार चाहिए। कानूनी गारंटी की मांग करने वालों को सोचना चाहिए कि इसके लिए सरकार के पास धन कहां से आएगा। अगर सरकार ने फसल खरीद भी लिया तो निपटान और भंडारण कैसे होगा।