नई दिल्ली। मीटू अभियान को लेकर महिला पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले की सुनवाई में पूर्व केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर ने कोर्ट में कहा कि प्रतिशोध में उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि पत्रकार ने उनके खिलाफ जो बयान दिया, वह लोगों की भलाई के लिए नहीं, बल्कि बदले लेने के लिए दिया गया।
राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी विशाल पाहुजा के समक्ष अपनी वकील गीता लूथरा के माध्यम से एमेज अकबर ने यह दलील दी है। उनकी वकील ने कोर्ट में कहा कि आपराधिक मानहानि के मामले से बचने के लिए महिला पत्रकार ने लोगों की भलाई के लिए इस मामले की खुलासा करने की बात कही, लेकिन वह ऐसा सिर्फ बदला लेने के लिए कर रही हैं।
कोर्ट के समक्ष अकबर की वकील ने कहा कि उन्होंने अपनी कहानी साबित करने के लिए ऐसा होई साक्ष्य पेश नहीं किया जिससे उनकी कहानी की प्रमाणिकता साबित हो। उन्होंने कहा कि महिला पत्र ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिससे उनके मुवक्किल की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
वकील ने कहा कि 20 साल पुरानी इस कहानी का दावा करने वाली महिला पत्रकार ने न ही कोई पार्किंग की स्लिप दी है, न ही कोई सीसीटीवी फुटेज दी है और न ही कोई लैडलाइन फोन कॉल रिकॉर्ड दिया है। इससे पिछली सुनवाई में महिला पत्रकार ने यह दलील दी थी कि उनके साथ 20 साल पहले हुई घटना को उन्होंने लोगों के भले के लिए जगजाहिर किया, ताकि कोई और ऐसी घटना का शिकार ना बन सके।
महिला पत्रकार ने 2018 में मीटू अभियान के जरिये 20 साल पहले उनके साथ कथित तौर पर एमजे अकबर द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन्हीं आरोपों के चलते अकबर को अपने मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ा था। इन आरोपों का खंडन करते हुए अकबर ने महिला पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवाया था।