राजधानी दिल्ली में हाईकोर्ट में 11 अदालतों व जिला अदालतों में वैकल्पिक तौर पर शारीरिक रूप से पेशी के आधार पर कामकाज शुरू हो गया। वकीलों ने कामकाज पर मिलीजुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कुछ वकीलों ने इसे ठीक बताया है तो कुछ ने स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही सुनवाई करवाने का तर्क रखा है।
कोरोना के मामलों में कमी को देखते हुए उच्च न्यायालय ने कुछ अदालतों में फिजिकल सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। हाल ही में हाईकोर्ट में 11 कोर्ट और निचली अदालतों में वैकल्पिक तौर पर एक दिन छोड़कर कामकाज सामान्य तरीके से करने का निर्णय लिया था।
अन्य अदालतों मे वीडियों कांफ्रेंसिंग सिस्टम से सुनवाई जारी रहेगी। अदालत में मामलों से संबंधित वकील व पक्षकारों को ही जाने की इजाजत रहेगी। यह निर्णय 20 फरवरी तक प्रभावित रहेगा और उसके बाद समीक्षा कर अगला निर्णय लिया जाएगा।
अधिवक्ता संतोष कुमार ने कहा कि अदालत में कामकाज शुरू होना जरूरी है लेकिन यदि कुछ समय तक इंतजार कर लिया जाता तो बेहतर है। अदालतों में वकीलों व उनके स्टाफ, मुकदमों को लेकर आने वाले लोगों, और अन्य की भीड़ बढ़ जाएगी। ऐसे में संभव नहीं है कि दो गज की दूरी रखी जा सके। काफी मुश्किल से स्थिति में सुधार हुआ है और इतने महीने रुके है तो सभी के फायदे के लिए फरवरी माह तक रूकना चाहिए था, अदालत का कामकाज तो चल ही रहा है।