-डूसू चुनाव में धन-बल को मात देने के लिए डीयू में गठबंधन जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डूसू चुनाव में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के बीच पिछली बार की तरह गठबंधन बरकरार है। हालांकि इस वर्ष जेएनयू छात्र संघ चुनाव में दोनों संगठनों ने अलग होकर चुनाव लड़ा था। ऐसे में डूसू चुनाव साथ लड़ने को लेकर संशय बना था। मगर, डूसू चुनाव को लेकर दोनों संगठनों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला रखा है।
दोनों ने संयुक्त तौर पर अंजलि को डूसू अध्यक्ष पद का उम्मीदवार, सोहन कुमार यादव को उपाध्यक्ष पद, सचिव पद के लिए अभिनंदना और अभिषेक कुमार को संयुक्त सचिव के पद पर मैदान में उतारा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन(आइसा) महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि गठबंधन टूटने और साथ में रहने के कई सारे राजनीतिक कारण होते है। छात्र राजनीति बहुत ज्यादा वाइब्रेंट होती है और उसमें तेजी से बदलाव होते हैं। जिसकी दिशा कैंपस की राजनीति से तय होती है।
जेएनयू छात्र संघ चुनाव में करीब आठ साल पुराना गठबंधन राजनीतिक मुद्दों के कारण टूटा था। डीयू में राजनीतिक और आंदोलन संबंधी मुद्दों पर आपसी सहमति है। इसलिए पिछले बार की तरह साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले वर्ष डूसू चुनाव के लिए जो उम्मीदवार मैदान में उतारे गए थे उसका असर देखने को मिला था। तीन हजार से लेकर नौ हजार वोट उम्मीदवारों को मिले थे।
एसएफआई दिल्ली राज्य समिति की सचिव आयशा घोष ने कहा कि धन-बल को मात देने के लिए डीयू में गठबंधन जरूरी है। अलग-अलग लड़ने से वोट बंट जाते है और फिर चुनौती नहीं दे पाते है। जिसका फायदा एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे छात्र संगठनों को मिलता है। इस वर्ष जेएनयू छात्र संघ चुनाव में गठबंधन में न लड़ने को लेकर कई कारण रहे थे। जिसका फायदा दूसरा संगठन को पहुंचा। लेकिन अब अगला चुनाव जेएनयू में साथ मिलकर लड़ेंगे ऐसी उम्मीद है।
ललित कौशिक
ललित कौशिक