फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीसरे दिन मरीजों की भीड़ उमड़ी, ज्यादातर की रक्त जांच नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
तीसरे दिन मरीजों की भीड़ उमड़ी, ज्यादातर की रक्त जांच नहीं
विज्ञापन

नई दिल्ली। दिल्ली एम्स में भीषण आग से तबाह हुए टीचिंग ब्लॉक के बाद सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दो दिन से ओपीडी नहीं होने के कारण प्रबंधन को भी पहले से अनुमान था कि काफी संख्या में मरीज पहुंचेंगे। इसलिए सुबह से ही ओपीडी में सभी विभागों के जूनियर और सीनियर डॉक्टर मरीजों का उपचार करते नजर आए। चिकित्सीय जांच के लिए ट्रामा सेंटर और आरपी सेंटर में वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, लेकिन आधे से ज्यादा मरीजों को बगैर रक्त जांच कराए वापस लौटना पड़ा। इसके पीछे एक वजह ट्रॉमा सेंटर की दूरी भी थी।
शनिवार को एम्स के टीचिंग ब्लॉक में भीषण आग लगने और इसमें हजारों मरीजों के रक्त जांच नमूने नष्ट होने की खबर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद रविवार को एम्स प्रबंधन ने आपात बैठक के बाद रक्त जांच नमूने के लिए ट्रॉमा सेंटर और आरपी सेंटर में वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया, लेकिन जब इन जगहों पर जानकारी ली गई तो बड़ी संख्या में मरीज हताश होकर बगैर जांच के ही वापस जा रहे थे। मरीजों ने कैमरे के आगे बोलने से इंकार कर दिया। उनका मानना था कि उन्हें आगे चलकर इलाज में दिक्कत हो सकती है। जिस टीचिंग ब्लॉक में भीषण आग लगी थी, वहां माइक्रोबॉयोलॉजी और पैथोलॉजी के तहत आने वाली देश की चुनिंदा अत्याधुनिक तकनीकों से लैस प्रयोगशालाएं थीं। इन प्रयोगशालाओं को स्थापित करने में सरकार को कई सौ करोड़ रुपये का बजट लगा था। साथ ही, इन तकनीकों से एम्स के डॉक्टरों को भी रोग की पहचान करने में आसानी थी। जेनेटिक से लेकर संक्रमण और एचआईवी तक के रोगों को लेकर यहां काफी बेहतर इंतजाम थे, जिन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।
विज्ञापन

उधर, केंद्रीय आरआईए प्रयोगशाला प्रमुख डॉ. प्रदीप कुमार चतुर्वेदी ने चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर आग में प्रयोगशाला को भारी नुकसान और रक्त जांच के नमूने नहीं लेने की जानकारी दी। पत्र से जाहिर है कि अगले कुछ दिन तक एम्स में इस तरह के हालात बने रह सकते हैं।
शुरू नहीं हो सकी जांच
आग के कारण सोमवार को रुमेटोलॉजी लैब, इम्यूनोलॉजी लैब, ईएनटी और बच्चों की जांच की मशीनें शुरू नहीं हो सकीं। डेंगू , इंफ्लुएंजा (फ्लू) और वायरस संबंधित बीमारियों की जांचों के अलावा ईएनटी और बच्चों की बीमारियों की अधिकतर जांचें प्रभावित रहीं। थायराइड, बलगम, ब्लड प्रोफाइल, होर्मोन, एचआईवी, मधुमेह, इम्यूनोग्लोबिन आदि जांच भी नहीं हो सकीं। इन जांचों की मरीज के इलाज में काफी अहम भूमिका है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर आगे के उपचार को लेकर फैसला लेते हैं।
विज्ञापन

शिफ्ट होंगी कुछ प्रयोगशालाएं
एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भीषण आग से हुए नुकसान की भरपाई एम्स लंबे समय तक नहीं कर सकता, लेकिन सभी कर्मचारी चिकित्सीय सेवाओं को वापस से पटरी पर लाने में कोशिश कर रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी लैब को एनाटमी और कन्वर्जेंस ब्लॉक में शिफ्ट करने जा रहे हैं। यहां पहले से भी कुछ प्रयोगशालाएं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें