अस्पताल के एक साथी कोरोना संक्रमित हो गए थे। मैं भी उनके संपर्क में आया था। अगले ही दिन अस्पताल में ड्यूटी के दौरान हल्का बुखार महसूस हुआ। इसको देखते हुए कोरोना जांच कराई। दो दिन बाद 13 मार्च को आई रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई। अस्पताल के डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांचा और होम आइसोलेशन में जाने की सलाह दी। घर पर अलग कमरे में रहा और इस दौरान लगातार डॉक्टरों के संपर्क में रहा। 14 दिन आइसोलेशन में रहने के बाद कोविड जांच कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। यह कहना है एम्स के नर्सिंग अधिकारी धनंजय यादव का, जिन्होंने घर पर ही रहकर कोरोना को मात दी।
धनंजय बताते हैं कि जब कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन सबसे पहले खुद को सकारात्मक रखने की कोशिश की। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक घर में अलग कमरे में रहा। आइसोलेशन के 15 दिनों में सभी नियमों का पालन किया। अपने पास थर्मामीटर और ऑक्सीप्लस मीटर रखा। नियमित रूप से अपने शरीर का तापमान और ऑक्सीजन का स्तर मांपा। बुखार होने पर दवा लेता था। घर से दूर था, लेकिन मेरे साथियों ने कभी किसी चीज की कभी महसूस नहीं होने दी। वह रोजाना कमरे के दरवाजे पर तीनों समय का भोजन और जरूरी दवाइयां रख जाते थे।
आइसोलेशन के दौरान नियमित रूप से भाप लेते था और कभी-कभी काढ़ा भी पीता था। ठीक होने के लिए प्रणायाम भी शुरू किया। कुछ ही दिन में स्वास्थ्य बेहतर होने लगा। 15 दिन बाद कोरोना की जांच कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। घनंजय का कहना है कि कोरोना को हराने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि खुद को सकारात्मक रखा जाए और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उपचार लिया जाए।
(एम्स के नर्सिंग अधिकारी धनंजय यादव ने जैसा अमर उजाला संवाददाता अभिषेक पांचाल को बताया।)