कोरोना महामारी के बाद प्रतिरोधी रोगाणुओं और सुपरबग के विकास का खतरा बढ़ गया हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। यह कहना है एम्स, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास का। वह एम्स के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध की रोकथाम पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान निदेशक ने कहा कि कोविड महामारी के बाद विभिन्न स्वास्थ्य पहलुओं को सामान्य पटरी पर लाना जरूरी है। वहीं प्रतिरोधी रोगाणुओं और सुपरबग के विकास की संभावनाओं से निपटना होगा।
सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च ने डब्ल्यूएचओ इंडिया के सहयोग से एम्स में ओरो-डेंटल संक्रमणों में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सा और दंत चिकित्सा में एंटी माइक्रोबियल के अंधाधुंध प्रयोग से बैक्टीरिया, वायरस और कवक के प्रतिरोधी उपभेदों के मामले बढ़ रहे हैं। दुनिया भर में कुल रोगाणुरोधी नुस्खों में एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) का करीब 10 फीसदी मामले दंत चिकित्सा क्षेत्र में है।
इस समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के डेंटल पेशेवरों ने इस समस्या से निपटने और ओरो-डेंटल संक्रमणों के लिए रोगाणुरोधी नुस्खों को तर्कसंगत बनाना जरूरी है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने जोर देकर कहा कि मानव जाति के रोगाणुरोधी प्रतिरोध का प्रभाव भविष्य में राष्ट्र की अर्थव्यवस्था, विकास और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है।
एएमआर नियंत्रण के लिए योगदान करना समय की मांग है। डॉ. पोलिन चान ने कहा कि माइक्रोबियल वनस्पतियों में बदलाव न केवल मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि पशु चिकित्सा स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, फसलों, जमीन पर और नीचे के पानी और समग्र पर्यावरण पर भी प्रभाव डालता है।