गर्मी से बचने के इंतजाम में जुटे किसान...
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टीकरी बॉर्डर धरना स्थल पर किसानों ने लगभग दर्जन भर टीन शेड और लगभग आधा दर्जन पक्के मकान बनाए हैं। किसानों ने कहा कि गर्मी और बरसात से सुरक्षित रहने के लिये जरूरत पड़ी तो ऐसे और भी मकान बनाएंगे। लेकिन किसान एक और महत्वपूर्ण बात कह रहे हैं कि जिस दिन सरकार उनकी बात मान लेगी वह धरना स्थल से सब कुछ समेटकर वापस चले जाएंगे।
टीकरी बॉर्डर पर किसान नेता अनिल मलिक ने कहा कि किसान दिल्ली में कब्जा करने नहीं आए हैं। वह केवल सरकार से अपना हक मांगने के लिए यहां 100 से ज्यादा दिनों से सड़क पर ठहरे हुए हैं। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि किसे सड़कों पर ट्रैक्टर और ट्राली में सोना अच्छा लगता है? लेकिन किसानों को यह पता है कि यदि वह इस दफा पीछे हटे तो उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा। किसानों को उम्मीद है सरकार उनकी बात समझेगी और उनको उनका हक जरूर देगी।
अनिल मलिक ने कहा कि जब तक देश के पांच राज्यों के चुनाव संपन्न नहीं होते तब तक सरकार किसानों से बातचीत करेगी, ऐसा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि टीकरी बॉर्डर पर अब तक जितने भी मकान बने हैं, उन पर टीनशेड और तिरपाल की छत है। किसी किसान ने पक्की छत नहीं बनाई है। किसान आंदोलन के समाप्त होने पर इन अस्थाई घरों को तोड़कर सब कुछ अपने साथ ले जाएंगे।
अनिल मलिक भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं और 26 नवंबर से टीकरी बॉर्डर पर डटे हैं। उन्होंने नौजवानों के साथ मिलकर यहां किसान सोशल आर्मी की शुरुआत की है। उनके सहयोगी बुजुर्ग किसानों की हर संभव सहायता कर रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक अब सिंघु पर ही होती है
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जोगिंदर घासीराम नैन ने बताया कि मौजूदा समय दिल्ली के तीनों किसान मोर्चों की बैठक सिंघु बॉर्डर पर होती है। सभी फैसले वहीं से लिए जाते हैं। सरकार से आगे की बातचीत कब होगी यह भी संयुक्त किसान मोर्चा जल्द तय करेगा। अभी तो किसानों ने 23 से 29 मार्च तक का कार्यक्रम तय कर रखा है।