22 को गिरफ्तार किया गया, अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दो एफआईआर दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर प्रदूषण प्रोटेस्ट के नाम पर हिंसा करने वाले 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो अलग पुलिस स्टेशन कर्तव्य पथ और संसद मार्ग थाने में एक-एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चिली स्प्रे भी बरामद किए हैं।
नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इंडिया गेट पर प्रदूषण के नाम पर कुछ युवा विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे लेकिन ये प्रदर्शन उस वक्त हिंसक बन गया जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस के जवानों पर मिर्ची वाले स्प्रे किए गए। सिर्फ इतना नहीं नहीं ये विरोध प्रदर्शन अब बड़ा मामला बन गया है क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के समर्थन में नारे लगा दिए। प्रदर्शनकारी युवाओं में से कुछ ने हिडमा के नाम के पोस्टर लिए हुए थे। नई दिल्ली जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इंडिया गेट से चार प्रदर्शनकारियों को पकड़ा गया था। इस बाबत नई दिल्ली के कर्तव्य पथ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी संसद मार्ग थाने पहुंच गए और यहां हंगामा करना शुरू कर दिया था। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार कुल 22 को गिरफ्तार किया गया है। इनमें छह लड़के और बाकी लड़किया हैं।
प्रदर्शनकारी सी-हेक्सागन में घुसे
जिला पुलिस उपायुक्त देवेश कुमार महला ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी सी-हेक्सागन में घुस गए और आवाजाही रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की। उन्हें समझाने की कोशिश की कि उनके पीछे कई एबुलेंस फंसी हुई हैं और उन्हें इमरजेंसी मदद की जरूरत है लेकिन वे बहुत ज्यादा आक्रोशित हो गए। पुलिसकर्मियों को लगा कि स्थिति हाथापाई तक बढ़ सकती है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटने की सलाह दी। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की तो कुछ प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर चिली (पेपर) स्प्रे का उपयोग करने लगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह पहली बार है कि किसी प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन में इस तरह का पेपर स्प्रे इस्तेमाल किया गया है। इस हमले में तीन-चार पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारी कुछ पोस्टर और नारे लेकर खड़े थे, जिनमें माओवादी कमांडर माडवी हिडमा का समर्थन किया गया था, जैसे माडवी हिडमा अमर रहे, अन्य नारे भी लिखे हुए थे। इससे पता लगता है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक, पर्यावरणीय और आदिवासी संघर्ष को माडवी हिडमा की माओवादी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की।