दिल्ली के करोल बाग एरिया के रिज रोड से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए आईएस के संदिग्ध आतंकी अबू यूसुफ उर्फ मो. मुस्तकीम खान ने उड़ीसा से फर्जी आईडी पर चालू की गई सिम खरीदी थी। इसी सिम से इंटरनेट के जरिए वह ‘स्योर स्पॉट’ एप से अपने आकाओं से चैटिंग व आईएस हैंडलर से बात करता था। पूछताछ में पता चला है कि वह कोरोल बाग में धमाके करने जा रहा था, लेकिन पहले ही धरा गया। पुलिस ने रिमांड अवधि खत्म होने पर उसे रविवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से 5 सिंतबर तक फिर से रिमांड पर भेजा।
स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अबू यूसुफ ने उड़ीसा में पीओपी का काम कर रखा था। उसने वहां से पहले से एक्टिवेटेड एक सिम खरीदी था। दुकानदार ने इस सिम को फर्जी आईडी पर चालू किया हुआ था। अबू ने कुछ हजार रुपये देकर इस सिम को खरीदा। अबू के पास से दूसरी सिम मिली है, जो उसने बलरामपुर से ही ली थी। यह उसने खुद की आईडी पर ही खरीदी थी, लेकिन इस फोन का इस्तेमाला देश विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं करता था।
धमाके करने वाली जगहों की रैकी भी कर ली थी
पूछताछ में खुलासा किया कि आईएस के पाकिस्तान निवासी हैंडलर ने उसे करोल बाग में ही बम धमाके करने के लिए कहा था। उसे दो जगह बम धमाके करने थे। आरोपी गिरफ्तारी के समय करोलबाग में ही धमाक करने के लिए जा रहा था। उसने उन जगहों की रैकी भी कर ली थी, जिन जगहों पर बम धमाके करने थे। स्पेशल सेल के एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि अबू यूसुफ को आश्रम पर बाइक दी गई थी। पहले वह धौला कुंआ बता रहा था। उसे बाइक के साथ ही पिस्टल व कारतूस मिले थे। स्पेशल सेल अबू के उड़ीसा वाले सिम की फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसके बाद ही पता लगेगा कि वह किससे बात करता था, क्या-क्या बातें करता था।