फीडबैक यूनिट (एफबीयू) मामले में दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एलजी कार्यालय ने पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और दो पूर्व मंत्रियों के पत्र को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया है। खुफिया जानकारियां इकट्ठा करने के लिए एफबीयू के गठन पर सवाल उठने के बाद पूर्व सांसद सहित दो पूर्व मंत्री मंगत राम सिंघल और किरण वालिया ने एलजी को पत्र लिखकर एनआईए या सीबीआई से जांच करवाने की मांग की थी।
आम आदमी पार्टी सरकार ने 2015 में विभिन्न विभागों और स्वायत्त निकायों के कामकाज संबंधी सूचनाएं एकत्रित करने के लिए फीडबैक यूनिट के गठन का प्रस्ताव किया था। 2016 में गोपनीय सेवाओं के मद में एक करोड़ रुपये खर्च की व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि उपराज्यपाल सचिवालय ने इस पत्र में किए गए अनुरोध को आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली के मुख्य सचिव को भेज दिया है।
कांग्रेस-भाजपा पर आप ने उठाए सवाल
आप ने निशाना साधते हुए कहा है कि यह देखना बहुत दिलचस्प है कि जब दिल्ली सरकार, बीजेपी से जुड़े किसी मामले की एलजी से शिकायत या संदर्भ लेती है तो वह उस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। लेकिन कांग्रेस नेताओं की एक शिकायत पर बीजेपी के एलजी ने तुरंत एक्शन लिया है। इससे पता चलता है कि कैसे भाजपा और कांग्रेस पीठ पीछे एक समान हैं। कांग्रेस और बीजेपी एक है। कांग्रेस बेनकाब हो गई है। पूरा देश देख रहा है कि कैसे बीजेपी, आप के खिलाफ झूठे मुकदमे लगाकर आम आदमी पार्टी को निशाना बना रही है। केवल आप ही है जो भाजपा से जी जान से लड़ रही है।