दिल्ली में अब एक नगर निगम होगा। केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को तीनों निगमों के विलय के विधेयक को मंजूरी दे दी। आम आदमी पार्टी (आप) इस मसले पर केंद्र सरकार और भाजपा पर हमलावर है। पार्टी सीधे-सीधे एकीकरण के औचित्य पर सवाल नहीं उठा रही है, लेकिन इसकी जगह केंद्र सरकार की मंशा को कटघरे में खड़ा किया है। निगमों के एकीकरण पर आए फैसले के बाद आप के एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक से अमर उजाला संवाददाता विनोद डबास ने विस्तार से चर्चा की। ]
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निगम को एक कर दिया गया। क्या कहेंगे?
सवाल निगमों के विलय का है ही नहीं, मसला इस फैसले के समय पर है। बीते 15 साल से भाजपा निगम में है, केंद्र में भी सात साल से भाजपा सरकार है। अगर दिक्कत थी तो इन लोगों ने विलय का फैसला पहले क्यों नहीं लिया? तीनों नगर निगमों की आर्थिक स्थिति अब खराब नहीं हुई है, वह तो गठन के समय से ही खस्ताहाल है। 15 साल से निगम में भाजपा वालों का जो कुशासन रहा है, उससे आज उसकी विश्वसनीयता संकट में है। सभी विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। आम लोग परेशान हैं। भाजपा को हार का डर है। इसलिए चुनाव टाले गए। निगमों का विलय डरजनित हकीकत का नतीजा है।
निगम के चुनाव के लिए आप कितने तैयार हैं?
हमने विधानसभा चुनाव के बाद से ही निगम चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। अब सिर्फ चुनाव की घोषणा का इंतजार है, मगर भाजपा हार के डर से चुनाव से भाग रही है। इसलिए उसने दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की घोषणा करने से रोक दिया।
चुनाव क्यों रोक दिया गया?
भाजपा पार्षदों के भ्रष्टाचार के कारण तीनों नगर निगमों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है। इसलिए तीनों निगम की आर्थिक स्थिति खराब होने के पीछे भाजपा जिम्मेदार है।
भाजपा आरोप लगाती है कि दिल्ली सरकार अड़चन पैदा कर रही है?
भाजपा पार्षद अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए हर मामले में दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हैं, लेकिन दिल्ली की जनता वाकिफ है कि नगर निगम से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं। आप नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बीते दो साल के दौरान जनता के बीच जाकर दिल्ली सरकार और नगर निगम के कार्यों के बारे में अवगत कराने का कार्य किया है।
क्या आम आदमी पार्टी निगमों के विलय के खिलाफ है?
आम आदमी पार्टी कभी तीनों नगर निगमों का विलय करने की विरोधी नहीं है, लेकिन पार्टी विलय की आड़ में चुनाव लटकाने का विरोध कर रही है। आप चाहती है कि चुनाव समय पर हो और तीनों नगर निगमों का विलय चुनाव के बाद भी किया जा सकता है। चुनाव लटकने पर जनता को नुकसान होगा, क्योंकि नगर निगम भंग रहने की स्थिति में वह केंद्र सरकार के अधीन हो जाएगी और अधिकारी बेलगाम रहेंगे। इस कारण जनता समस्याओं से जूझती रहेगी।
दिल्ली सरकार ने किस तरह मदद की?
दिल्ली सरकार ने हर कदम पर तीनों नगर निगमों की मदद की। उन्हें फंड की किस्त समय पर दी गई। उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने के मद्देनजर उनसे ऋण की किस्त नहीं ली गई और ब्याज भी नहीं मांगा, मगर उनकी नीयत ही खराब है।
चुनाव लटकने की स्थिति में आप की पार्टी क्या करेगी?
आप ने चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट के निर्णय के बाद आप भावी कदम उठाएगी। वैसे चुनाव समय पर नहीं कराने की स्थिति में आप जनता के बीच जाएगी।