पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में जल्द ही आधुनिक ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इसे मंजूरी भी दे दी है। ट्रॉमा सेंटर के बनने से सड़क हादसों, गंभीर चोट, हिंसक घटनाओं और अन्य आपातकालीन मामलों में मरीजों को तुरंत और बेहतर इलाज मिल सकेगा।ट्रॉमा सेंटर का निर्माण के लिए केंद्र सरकार 160 जबकि दिल्ली सरकार 60 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
यह जानकारी गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीन कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह ट्रॉमा सेंटर पूर्वी दिल्ली क्षेत्र की सबसे बड़ी आपातकालीन चिकित्सा सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा। नए ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से इलाज में देरी कम होगी और गोल्डन ऑवर के भीतर मरीजों को उपचार मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर ट्रॉमा सेंटर को पूरी तरह से कार्यशील बना दिया जाए, ताकि लोगों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लेस
प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं, विशेष ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, वेंटिलेटर सपोर्ट, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और पैथोलॉजी की त्वरित जांच सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती की जाएगी।
पूर्वी दिल्ली और आसपास के इलाकों को राहत
जीटीबी अस्पताल केवल पूर्वी दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली, लोनी, गाजियाबाद और सीमावर्ती इलाकों के मरीजों के लिए भी प्रमुख इलाज केंद्र है। ट्रॉमा सेंटर बनने से इन क्षेत्रों के लोगों को पास में ही गंभीर इलाज मिल सकेगा और बड़े अस्पतालों पर दबाव भी कम होगा। फिलहाल ट्रॉमा की समर्पित सुविधा न होने के कारण कई मरीजों को सफदरजंग, एलएनजेपी या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर की प्रमुख सुविधाएं
24 घंटे इमरजेंसी ट्रॉमा केयर, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वेंटिलेटर सुविधा, सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे, प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ, दुर्घटना और गंभीर चोट के मरीजों का त्वरित इलाज इस ट्रॉमा सेंटर की प्रमुखता रहेगी।