-जेएनयू शिक्षक संघ की जीबीएम में प्रस्ताव हुआ पारित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सामाजिक विज्ञान संकाय के राजनीतिक अध्ययन केंद्र के संकाय सदस्य डॉ. रोहन वीएच चौधरी की सेवा समाप्ति को लेकर विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। इस संबंध में जेएनयू शिक्षक संघ ने जीबीएम में जेएनयू कुलगुरु को पद से हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखने का प्रस्ताव पारित किया गया। शिक्षक बर्खास्तगी के खिलाफ एक सितंबर को प्रशासनिक ब्लॉक पर विरोध दर्ज कराने सहित कई दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
जेएनयू शिक्षक संघ अध्यक्ष सुरजीत मजमूदार ने कहा कि शिक्षक की बर्खास्तगी जेएनयू के अधिनियम, विधियों और अध्यादेशों के प्रावधान का मजाक है। यह विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) का नहीं बल्कि जेएनयू कुलगुरु का निर्णय था। यह व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। जेएनयू के नियमों के अनुसार किसी शिक्षक की बर्खास्तगी के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। 26 अगस्त को हुई 323 वीं ईसी बैठक में सदस्यों की संख्या 13 थी। जिसमें दो तिहाई बहुमत के लिए न्यूनतम नौ सदस्य जरूरी हैं। तीन निर्वाचित सदस्यों ने लिखित रूप से अपनी असहमति दर्ज कराई है। हालांकि उनमें से केवल एक को ही बोलने की अनुमति दी गई थी और वह भी बहुत संक्षेप में थी।
शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ छात्र संघ भी विरोध दर्ज करा रहा है। बर्खास्त संकाय सदस्य पर बिना किसी पूर्व सूचना के करीब 51 दिन तक अवकाश पर रहने का आरोप है। इसके चलते शिक्षक पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है। शिक्षक प्रोबेशन पर था। शिक्षक की बर्खास्तगी को लेकर जेएनयू कुलगुरु की ओर से 27 अगस्त को एक आदेश जारी किया गया है।