नई दिल्ली। मुंबई के बिल्डर को 50 करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर 96 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी गोविंद झा, ठाणे (महाराष्ट्र) निवासी संजू कुमार सिंह उर्फ दिनेश, करार हुसैन खान, वसीम उर्फ उमेश, यूपी के सिद्धार्थ नगर के गांव डुबोली निवासी तौफीक अहमद उर्फ सैफुल्लाह उर्फ भावेश, यूपी के राय बरेली के ऊंचाहर निवासी विजय कुमार उर्फ अभय प्रताप सिंह और बिहार निवासी आनंद सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगे गए 30 लाख रुपये के अलावा लोन के लिए तैयार फर्जी कागजात की कलर फोटो स्टेट कॉपी भी बरामद की है।
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त दीपक यादव ने बताया कि 6 अप्रैल को ईस्ट मुंबई निवासी पंकज कुमार सिंह नामक बिल्डर ने लक्ष्मी नगर थाने में 96 लाख रुपये ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पंकज ने बताया कि उनको अपने कारोबार के लिए रुपयों की जरूरत थी। कुछ दिन पूर्व सुधीर दूबे नामक शख्स के जरिये उनकी मुलाकात ठाणे निवासी करार हुसैन खान से हुई। सुधीर ने बताया कि करार हुसैन 50 करोड़ के प्राइवेट लोन का इंतजाम कर सकता है। इसके बाद करार ने उसे आनंद कुमार सिंह से मिलवाया। इनके बीच दिल्ली के अलावा देश के बाकी शहरों में कई मीटिंग हुईं। बाद में गोविंद झा नामक शख्स फाइनेंसर बनकर मिला। उसने बताया कि स्टैंप पेपर खरीदने के लिए पहले तीन फीसदी रकम (डेढ़ करोड़) एडवांस में देने होंगे। पंकज झांसे में आ गया और उसने 96 लाख रुपये कैश और चेक के जरिये दे दिए। इसके बाद आरोपियों ने लोन के पेपर देखने के लिए 13 फरवरी को गुजरात के वडोदरा बुलाया। बाद में लोन के कागजात पूरे करने के लिए उसे चैन्नई बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर आरोपियों ने जानबूझकर लोन के स्टैंप पेपर खोने का नाटक किया। बाद में सभी ने पीड़ित से दूरी बना ली।
शिकायत मिलने के बाद फौरन मामला दर्ज कर लक्ष्मी नगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल की डिटेल निकलवाई। गोविंद झा के लक्ष्मी नगर इलाके में होने का पता चला। आठ अप्रैल को पुलिस की टीम ने उसे दबोच लिया। अगले ही दिल गोविंद की निशानदेही पर ठगी के 30 लाख रुपये बरामद कर लिए गए। बाद में पहले संजू कुमार उर्फ दिनेश को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद तौफीक अहमद खान, वसीम और विजय को दबोचा गया। इसके बाद अलग-अलग जगहों से आनंद सिंह और करार हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान पता चला कि ठगी का मुख्य साजिशकर्ता करार खान है। उसने ही पीड़ित से पहली मीटिंग कर बाकी आरोपियों को ठगी में शामिल किया था। पीड़ित को अपने जाल में फंसाकर उससे रुपये ऐंठने के बाद आरोपियों ने लोन के पेपर खोने का नाटक कर अपने-अपने फोन बंद कर लिए।