नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू कैंपस में गत रविवार को हुई हिंसा के मामले में नौ आरोपी छात्रों की पहचान कर ली है। इनमें जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष, एक काउंसलर समेत सभी जेएनयू के छात्र हैं। आरोपियों में आईशी घोष समेत सात वामपंथी संगठन से और दो एबीवीपी से जुड़े हैं। पुलिस ने सबूत के तौर पर इनके पोस्टर भी जारी किए हैं। हालांकि इनमें से अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस जल्द ही इन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगी। पुलिस का कहना है कि जेएनयू हिंसा में चार छात्र संगठनों के नाम सामने आए हैं। आरोपियों की पहचान हिंसा के समय बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से हुई है। हालांकि कैंपस में हुई हिंसा में नकाबपोश कौन थे? पुलिस इनकी पहचान छह दिन बाद भी नहीं कर पाई है।
जेएनयू हिंसा की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख डॉक्टर जॉय टर्की ने बताया कि सर्वर खराब कर देने की वजह से कैंपस के सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज नहीं मिल पाई। कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। जांच टीम के पास 30 से 32 ऐसे गवाह है, जिनसे पुलिस ने बात की थी। हालांकि इनमें से किसी ने वीडियो नहीं बनाया। इसके अलावा कैंपस में हिंसा के समय कुछ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। रविवार शाम सात बजे हिंसा के समय यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप में करीब 60 सदस्य हैं और योगेंद्र भारद्वाज इसका एडमिन है। व्हाट्सएप ग्रुप के आधार पर अब तक नौ आरोपियों की पहचान की गई है।
हिंसा में अब तक 3 एफआईआर
डॉ. टर्की ने बताया कि जेएनयू हिंसा मामले में तीन एफआईआर हुई हैं। हिंसा में चार छात्र संगठनों स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) के नाम सामने आए हैं। इन छात्र संगठनों के पदाधिकारी ही जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारी हैं। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मनदीप सिंह रंघावा ने बताया कि कुछ दिनों से देखा जा रहा था कि मीडिया में गलत सूचनाएं चल रही थीं। इन सूचनाओं को देखकर केस के बारे में अपडेट देने के लिए प्रेसवार्ता बुलाई गई। उन्होंने कहा कि हिंसा मामले में ज्यादातर छात्र जेएनयू के हैं। मामला बहुत ही संवेदनशील है। लिहाजा जांच में छात्रों के भविष्य को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
मेरे पास सबूत, नकाबपोश गुंडे कौन थे: आईशी घोष
पुलिस की ओर से आरोपियों के फोटो जारी किए जाने के बाद जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने जांच व कार्रवाई ठीक से नहीं की है। उन्होंने कहा कि कैंपस के अंदर नकाबपोश भीड़ ने मुझ पर हमला किया। हमारे पास भी सबूत हैं कि नकाबपोश गुंडे कौन थे? हमने कुछ गलत नहीं किया, इसलिए डर नहीं लगता।
हिंसा में छात्रों का शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण: निशंक
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि जेएनयू हिंसा पर दिल्ली पुलिस की पहली जांच में विश्वविद्यालय के ही छात्रों का शामिल होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा और अराजकता को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा विश्वविद्यालयों को हिंसा और राजनीति का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने विकास की जगह शिवपूजन की फोटो जारी की
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में विकास पटेल की बजाय शिवपूजन मंडल की फोटो जारी कर दी। एबीवीपी के विरोध जताने पर गलती पकड़ में आई और पुलिस ने कुछ ही देर बाद विकास की फोटो जारी कर दी। दिल्ली पुलिस ने आनन-फानन में प्रेेस वार्ता बुलाकर जेएनयू हिंसा मामले में अहत सबूत हाथ लगने की घोषणा कर दी थी। पुलिस ने हिंसा करने वाले नौ आरोपियों की पहचान करने की घोषणा कर दी। सभी आरोपियों के फोटो भी जारी किए दिए। विकास पटेल की जगह शिवपूजन की फोटो देख एबीवीपी ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा दिल्ली पुलिस को जो सहयोग एबीवीपी से चाहिए वह देने को तैयार हैं। हालांकि शिवपूजन मंडल के हाथ में भी डंडा दिख रहा है। पुलिस शिवमंडल को भी आरोपी बना सकती है। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी अनिल मित्तल ने बताया कि ऐसा भूलवश हुआ है।
आरोपियों के नाम
-चुनचुन कुमार: जेएनयू का पूर्व छात्र और कैंपस में ही रहता है
-पंकज मिश्रा : माही-मांडवी हॉस्टल में रहता है
-आईशी घोष : जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष
- भास्कर विजय : छात्र
- सुजेता ताल्लुकदार : जेएनयू स्कूल पार्षद
- प्रिया रंजन: तृतीय वर्ष का छात्र
-डोलन सांवत
-योगेंद्र भारद्वाज: पीएचडी, (संस्कृत) हिंसा के समय बना व्हाट्सएप ग्रुप यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट का एडमिन
-विकास पटेल: छात्र, कोरियन भाषा से एमए कर रहा है