दिल्ली सरकार ने बीते करीब 20 दिनों में मार्च और अप्रैल का राशन बांट दिया है। इसमें वो लोग भी शामिल हैं जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं। सरकार का दावा है कि इसके सहारे गरीबों को राशन से जुड़ी दिक्कत नहीं आएगी। फिर भी यदि किसी को आवेदन नहीं कर पाने से राशन नहीं मिला है तो वह भोजन केंद्रों पर जाकर खाना खा सकते हैं।
सरकार की कोशिश है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहने पाए। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 17.50 लाख परिवारों को दो महीने का राशन मुहैया करा दिया है। इसमें लाभार्थियों की संख्या 71,60,074 है।
लॉकडाउन की वजह से इनके खाद्यान्न का 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल का सामान्य मासिक कोटा बढ़ाते हुए 6 किलो गेहूं और 1.5 किलो चावल मुफ्त देने का फैसला किया है। मार्च व अप्रैल का 100 फीसदी खाद्यान्न बांट दिया गया है।
इनके अलावा सरकार उन्हें भी राशन दे रही है जिनका राशनकार्ड नहीं है। ऑनलाइन आवेदन करने व देश के किसी हिस्से का राशनकार्ड होने पर ऐसे लोगों को मुफ्त में 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल दिया जा रहा है।
इसके लिए दिल्ली सरकार, नगर निगम और एनडीएमसी के करीब 374 स्कूलों को वितरण केंद्र के रूप में नामित किया गया है। सरकार ने अभी तक करीब तीन लाख लोगों को इस वर्ग में राशन मुहैया कराया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बावजूद इसके अगर किसी को राशन नहीं मिल पाता तो सरकार ने करीब 10 लाख लोगों के खाने का भी इंतजाम किया है। भोजन वितरण केंद्रों पर लोग दोपहर व रात का खाना ले सकते हैं।